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जबलपुर: तीन दिन खनन माफिया और चोरों को खुली छूट,माइनिंग अधिकारी कॉन्क्लेव में व्यस्त, कोई नहीं कार्यवाही करने वाला

जबलपुर। जिले में सक्रिय खनिज माफिया और चोरों के आगे अगले तीन दिनों तक प्रदेश सरकार जिला प्रशासन और चोरी को रोकने के लिए गठित किया गया माइनिंग विभाग लचर,विवश बेबस और नतमस्तक स्थिति में नजर आ रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि सूचना देने के बाद भी प्रशासन तंत्र अवैध रूप से खनिज चोरी करने वाले खनिज माफिया ,खनिज चोरों के खिलाफ कार्यवाही करने से पीछे हट रहा है। उसका यह कारण है कि 23 तारीख को कटनी जिले में माइनिंग कॉन्क्लेव का बड़ा आयोजन होने जा रहा है जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी शामिल होने आ रहे हैं। माइनिंग अधिकारियों को इस कॉन्क्लेव को सफल बनाने की चिंता है, लेकिन इस बात की चिंता नहीं है कि जो खनिज चोरी रोकने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है उसका निर्वहन कौन करेगा ? जबलपुर संभाग में खनिज विभाग का इतना बड़ा कार्यालय बना है दर्जनों लोग उसमें पदस्थ हैं । हर क्षेत्र के निरीक्षक को अपने क्षेत्र में खनिज की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन उसके बावजूद भी अगर विभाग खुलेआम सड़क किनारे की जा रही खनिज की चोरी को रोकने से कदम पीछे हटाए तो फिर से विभाग के औचित्य पर ही सवाल उठने लगते हैं। दो दिन बाद प्रदेश स्तर पर माइनिंग का बड़ा कॉन्क्लेव होने जा रहा है। निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हर स्तर पर संभव प्रयास कर रहे हैं। माइनिंग के बड़े बड़े कारोबारी इस कॉन्क्लेव में हिस्सा लेने आएंगे। उनके सामने क्या इस बात का भी प्रदर्शन होगा कि जबलपुर संभाग के खनिज अधिकारी माफिया और खनिज चोरों के आगे नतमस्तक है।

5 दिन से जारी, क्षेत्र निरीक्षक को नहीं जानकारी-
बड़ी विडंबना की बात है कि जिनकी मर्जी के बिना उनके क्षेत्र का एक पत्थर भी कोई ले जा सकता ऐसे खनिज निरीक्षक को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उनके क्षेत्र में बधैयाखेड़ा ग्राम की बरगी नहर की सड़क के किनारे खुले आम 5 दिन पहले से अवैध खुदाई कर मुरम निकाल कर बेची जा रही है। ग्रामीणों के माध्यम से जब यह शिकायत सामने आई तो और खनिज अधिकारियों तक पहुंची तो वे सभी ऐसे अनभिज्ञ बन गए जैसे उन्हें ना तो क्षेत्र की जानकारी है और ना ही 5 दिनों से खुलेआम चल रहे अवैध उत्खनन की।

थमी कार्यवाही,अधिकारियों में भ्रम की स्थिति-
अवैध रूप से होने वाली खनिज चोरी से शासन को राजस्व का भी बहुत बड़ा नुकसान होता है। लेकिन वर्तमान में न्यायिक और गैर न्यायिक कार्यों के गुणा भाग में उलझे तहसीलदार और नायब तहसीलदार के बीच में निर्मित भ्रम की स्थिति के कारण भी कोई भी कार्यवाही नहीं हो पा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के पूर्व जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर एसडीम जबलपुर अभिषेक सिंह द्वारा टीम गठित कर भेजा गया था। जिसमें तहसीलदार प्रदीप तिवारी ने अकेले ही अपने राजस्व अमले के साथ एक हफ्ते के अंदर 5 से 7 वाहनों को पकड़ा था। जिनमें से कुछ अवैध खनिज का परिवहन करते भी पाए गए थे। लेकिन तहसीलदारों के बीच में निर्मित कार्य विभाजन की विरोधाभासी स्थिति के कारण राजस्व विभाग के माध्यम से होने वाली कार्यवाही भी शिथिल पड़ी है।

तीन दिन कुछ नहीं हो सकता-
माइनिंग अधिकारी अशोक राय का कहना है कि अगले 3 दिनों तक अवैध उत्खनन के खिलाफ कोई भी कार्यवाही करने की संभावना नहीं है। क्योंकि सभी कटनी में आयोजित होने जा रही माइनिंग कॉन्क्लेव में व्यस्त है। अब खनिज चोरी हो रहा है क्या कर सकते हैं। जो होगा 3 दिन बाद ही हो पाएगा। खनिज अधिकारी के बयान से साफ है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के जबलपुर आगमन और उनकी मौजूदगी को वो नजरअंदाज करते हुए अपने विभागीय नंबर बढ़ाने के लिए पूरा ध्यान खनिज कॉन्क्लेव पर लगा रहे हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि खनिज विभाग की स्थापना मूल अवधारणा जो की खनिज की चोरी रोकना है वह प्राथमिकता से नदारत हो चुका है।

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