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जबलपुर: नाम जप की नौका से होगा भवसागर पार,पुरानी जगदम्बा कॉलोनी में श्रीमद् भागवत कथा, व्यासपीठ से गूंजे सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचन

जबलपुर। कलयुग रूपी भवसागर को पार करने का एकमात्र साधन भगवान का नाम जप और कीर्तन है। इस कलियुग में अन्य किसी साधन से मुक्ति संभव नहीं, केवल हरिनाम ही जीव को मोक्ष दिलाने वाला है। पुरानी जगदम्बा कॉलोनी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए शिव मंदिर कचनार सिटी (बड़े शंकर जी) के मुख्य आचार्य एवं मां दक्षिणेश्वरी धाम के संस्थापक कथावाचक सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों में भगवान के नाम स्मरण और कीर्तन की महिमा का विस्तार से उल्लेख है। नाम जप से जीव के सारे कष्ट दूर होते हैं और अंततः भगवत्प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रीमद्भागवत महापुराण से लेकर श्रीरामचरितमानस तक सभी धर्मग्रंथ यही बताते हैं कि कलियुग में नाम ही कल्याण का एकमात्र साधन है। आचार्य शास्त्री ने कहा—“भवसागर में नाव के समान नामजप ही मनुष्य को उस पार ले जाता है। जो निरंतर भक्ति में लीन रहकर हरिनाम का जाप करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है।”

भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु-
कथा से पूर्व आचार्य अमित उपाध्याय और संजय उपाध्याय ने विधिविधान से देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन कराया। इसके बाद वातावरण भक्ति गीतों से गूंज उठा। शिवा विश्वकर्मा ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे पंडाल में “हरे कृष्ण-हरे राम” की ध्वनि गूंजती रही और श्रद्धालु झूमते हुए कीर्तन में शामिल हुए।

पितृपक्ष में विशेष आयोजन-
स्व. वायके शर्मा की स्मृति में पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित इस कथा में व्यासपीठ का पूजन सरला शर्मा और रश्मि शर्मा ने किया। आयोजन समिति ने बताया कि पितृपक्ष में कथा श्रवण और नामजप का विशेष महत्व बताया गया है। इसी भाव से इस कथा का आयोजन किया गया, ताकि समस्त पितरों को तृप्ति प्राप्त हो और समाज में भक्ति का संदेश पहुँचे।

यह रहे उपस्थित-
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। सरला शर्मा, रश्मि शर्मा, शरद शर्मा, अभय शर्मा, प्रभव, शांतनु, शिवा विश्वकर्मा, शिवम, रिया, प्रिंसी सहित अन्य भक्तों ने श्रद्धा के साथ भाग लिया। वातावरण ऐसा था मानो हर कोई प्रभु की भक्ति में सराबोर होकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प कर रहा हो।

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