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जबलपुर पुलिस की कार्रवाई पर डीजे संचालकों का हंगामा! चार बॉक्स की अनुमति, फिर 10-10 डिब्बे लगाकर सड़क पर क्यों उतरे? नियम तोड़ेंगे तो कार्रवाई होगी!

जबलपुर। नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस कार्रवाई करे, तो विरोध और धरना-प्रदर्शन क्यों? जबलपुर में डीजे वाहनों पर हुई कार्रवाई को लेकर अब डीजे संचालक प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चार साउंड बॉक्स की सीमा तय है, तो वाहनों पर आठ से दस या उससे अधिक बॉक्स लगाकर चलने की जरूरत क्या है? सामने आई जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने ऐसे ही वाहनों पर कार्रवाई की है। यदि निर्धारित सीमा का उल्लंघन हुआ है, तो पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने से पहले संचालकों को अपने पक्ष के तथ्य भी सामने रखने चाहिए।

कंट्रोल रूम में बैठक, अधिकारियों ने पहले ही दिए थे निर्देश,
डीजे संचालकों की कंट्रोल रूम में हुई बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि रात 10 बजे के बाद डीजे नहीं बजेगा, चार साउंड बॉक्स से अधिक नहीं लगाए जाएंगे और रोड डीजे संचालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जब समय और बॉक्स की सीमा को लेकर पहले ही निर्देश दिए जा चुके थे, तो उनका पालन करना संचालकों की जिम्मेदारी थी। अब सवाल यह है कि निर्देशों के बावजूद यदि अधिक बॉक्स लगाए गए, तो कार्रवाई का विरोध किस आधार पर किया जा रहा है?

आठ-दस बॉक्स लगाकर फिर कार्रवाई पर सवाल क्यों?
डीजे संचालकों का कहना है कि इस व्यवसाय से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी है। उनकी रोजी-रोटी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नियमों की अनदेखी की जाए। यदि अनुमति चार बॉक्स की है और वाहन पर आठ-दस बॉक्स लगाए गए हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि निर्धारित सीमा का पालन क्यों नहीं किया गया। पुलिस का काम नियमों को लागू कराना है। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है, हालांकि हर मामले में कार्रवाई का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।

कार्रवाई के बाद धरना और थाने में बॉक्स जमा करने की चेतावनी!
कार्रवाई से नाराज डीजे संघ ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि कार्रवाई जारी रहने पर साउंड बॉक्स थानों में जमा कर दिए जाएंगे। लेकिन सवाल है कि जब बैठक में नियम पहले ही स्पष्ट कर दिए गए थे, तो अब धरना-प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ रही है? यदि किसी संचालक के साथ गलत कार्रवाई हुई है, तो वह अनुमति, जब्ती रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर शिकायत कर सकता है। केवल विरोध जताने से नियम बदल नहीं जाते।

पुलिस का संदेश साफ—नियमों से ऊपर कोई नहीं!
जबलपुर पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। डीजे संचालकों को भी समझना होगा कि सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाते समय निर्धारित अनुमति, ध्वनि सीमा और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन अनिवार्य है। व्यवसाय करने का अधिकार है, लेकिन नियम तोड़ने की छूट नहीं।

अब बड़ा सवाल यही है—जब चार बॉक्स की सीमा तय थी, तो आठ-दस बॉक्स लगाने वाले वाहनों पर कार्रवाई का विरोध क्यों? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसका जवाब भी देना होगा। जबलपुर में कानून-व्यवस्था और नियमों का पालन सर्वोपरि है—और नियम तोड़ने पर कार्रवाई होना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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