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जबलपुर: मां झोपड़ी में मरी, बेटो को खबर नहीं…सड़क पर घंटो पड़ा रहा लावारिस शव,मोक्ष संस्था ने निभाई इंसानियत की भूमिका, प्रशासन और समाज ने झाड़ा पल्ला

जबलपुर। संस्कारधानी ने सोमवार को दो ऐसी मौतें देखीं, जिन्होंने इंसानियत को आईना दिखा दिया। एक वृद्धा की लाश झोपड़ी में दिनभर पड़ी रही, तो दूसरी घटना में एक वृद्ध भिक्षुक का शव सुबह से शाम तक सड़क किनारे पड़ा रहा, लेकिन संवेदनहीन सिस्टम आंख मूंदे बैठा रहा।
मौत की खबर पाकर सिवनी से पहुंचे-
धनवंतरी नगर महाराणा प्रताप वार्ड स्थित मढ़फिया के पीछे झोपड़ी में रहने वाली 75 वर्षीय संपत्तिया आर्माे की लाश करीब 24 घंटे तक वहीं पड़ी रही। भूख और बीमारी से क्षेत्र में चर्चित जूझती अम्मा भीख मांगकर गुजारा करती थीं। पड़ोसियों को झोपड़ी से कोई हलचल न दिखी तो उन्होंने ‘मोक्ष संस्था’ के संस्थापक आशीष ठाकुर को सूचना दी। मौके पर पहुंचे सहयोगियों ने जब दरवाजा खोला, तो वृद्धा मृत अवस्था में मिलीं। पड़ोसियों से मिली जानकारी के बाद संस्था ने उनके सिवनी में रह रहे दो बेटों से संपर्क कर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करवाई। बेटों ने नम आंखों से कहा हमें नहीं पता था मां ज़िंदा हैं। मोक्ष का आभार है कि हमें उन्हें मुखाग्नि देने का अवसर मिला।
सड़क किनारे शव, शिकायत के बाद पहुंची पुलिस-
थाना गढ़ा अंतर्गत पिसन्हारी मडिया चौक पर एक अज्ञात वृद्ध भिक्षुक का शव सुबह से ही सड़क किनारे पड़ा था। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस को कई बार सूचना दी, लेकिन दोपहर तक कोई मदद नहीं मिली। शाम करीब 5 बजे जब राहगीर संतोष तिवारी ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, तब कहीं जाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव पीएम के लिए भेजा गया।
इनकी रही सराहनीय भूमिका-
मोक्ष संस्था के संस्थापक आशीष ठाकुर, कार्यकर्ता प्रशांत, आकाश, अमित, राजू, प्रबल की इस पूरे घटनाक्रम में सराहनीय भूमिका रही। लेकिन नगर निगम से लेकर प्रशासन और पुलिस का कोई भी अधिकारी या सफाई अमला नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में रोष रहा।

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