जबलपुर में चाकूबाजों का आतंक! दशहरा चल समारोह में युवक पर चाकू से हमला, बचाव में पहुंचे SI संजय गुर्जर भी घायल—गढ़ा पुलिस ने भीड़ के बीच से आरोपियों को निकाला
खुशियों के उत्सव में हिंसा का खंजर, गढ़ा में चाकूबाजी से मचा हड़कंप

जबलपुर में दशहरा चल समारोह का माहौल था, लोग उत्सव के अंतिम दौर में शामिल थे, लेकिन इसी बीच कुछ लोगों के विवाद ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सुबह करीब 5 बजे गढ़ा थाना से महज 50 फीट की दूरी पर हुई चाकूबाजी की घटना ने हर किसी को चौंका दिया। शांतिनगर निवासी अनुराग पांडे चाकू लगने से घायल हो गए और उन्हें उपचार के लिए मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। सवाल उन लोगों से है, जो मामूली विवाद में भी हथियार निकालने से नहीं हिचकते। आखिर किसी की जान को खतरे में डालने का अधिकार इन्हें किसने दिया?
चाकू लेकर हिंसा करने वालों को रोकने पहुंचे SI, खुद हुए घायल,
घटना के दौरान बीच-बचाव कर स्थिति संभालने पहुंचे गढ़ा थाने के सब इंस्पेक्टर संजय गुर्जर भी चाकू लगने से घायल हो गए। उनके चेहरे पर चोट आई। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ अपराध के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि मौके पर बिगड़ते हालात को नियंत्रित कर लोगों की सुरक्षा करना भी है। इस घटना में पुलिस अधिकारी का घायल होना बताता है कि चाकूबाजी कितनी खतरनाक हो सकती है। हथियार के दम पर दहशत फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
आक्रोशित भीड़ ने घेरा, पुलिस ने आरोपियों को सुरक्षित निकाला,
घटना के बाद गढ़ा पुलिस ने आकाश कोस्टा और उसके एक साथी को हिरासत में लिया। इसी दौरान आक्रोशित लोगों ने दोनों को घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। स्थिति और बिगड़ सकती थी, लेकिन पुलिस ने दोनों आरोपियों को भीड़ के बीच से निकालकर सुरक्षित थाने पहुंचाया। यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण थी। आरोपियों को भीड़ के हवाले छोड़ देना किसी नई हिंसक घटना को जन्म दे सकता था। पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई का रास्ता सुनिश्चित किया।
आकाश कोस्टा के खिलाफ पहले से चार मामले दर्ज होने की जानकारी,
गढ़ा CSP आशीष जैन के मुताबिक, आकाश कोस्टा के खिलाफ मारपीट और आर्म्स एक्ट सहित चार मामले पहले से दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। चाकूबाजी के पीछे की वजह, घटना में इस्तेमाल हथियार और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसी भी आरोपी का दोष अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।
चाकू नहीं, कानून की ताकत चलेगी—अपराधियों के लिए साफ संदेश,
दशहरा जैसे सार्वजनिक आयोजन आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। ऐसे अवसर पर चाकू निकालकर हमला करना न सिर्फ घायल व्यक्ति की जिंदगी को खतरे में डालता है, बल्कि पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा करता है। विवाद का जवाब हथियार नहीं हो सकता। चाकूबाजी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं भीड़ द्वारा आरोपियों की पिटाई जैसी घटनाओं को भी रोकना जरूरी है। कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है।
चाकू के दम पर दहशत फैलाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। घायल युवक और सब इंस्पेक्टर संजय गुर्जर को न्याय मिले, घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को उनके कृत्य की सजा अदालत से मिले। गढ़ा पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।