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जबलपुर में पुलिस हिरासत में युवक की मौत से जबलपुर में बवाल! परिजनों ने लगाए मारपीट के गंभीर आरोप, बरगी विधायक ने दिया कार्रवाई का भरोसा—अब मजिस्ट्रियल जांच में खुलेगा मौत का राज!

जबलपुर। जबलपुर में युवक आकाश चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। लॉर्डगंज थाना क्षेत्र के गढ़ा फाटक में महाकाली दर्शन के दौरान पुलिस युवक को अपने साथ थाने ले गई थी। कुछ समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में मौत की खबर सामने आई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मजिस्ट्रियल जांच के जरिए मौत की परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा।

परिजनों का गंभीर आरोप—थाने में क्या हुआ आकाश के साथ?
मृतक आकाश चौधरी, निवासी भंभकी, शाहपुरा के परिजनों का आरोप है कि युवक को पुलिस थाने ले गई थी, जहां उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। आकाश के भाई विवेक चौधरी ने भी पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वह अपने भाई के बारे में जानकारी लेने थाने पहुंचे, तो उनके साथ कथित तौर पर अभद्रता की गई और उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया। परिजनों के मुताबिक, बाद में उन्हें आकाश की मौत की जानकारी मिली। परिवार अब इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।

बरगी विधायक पहुंचे, परिजनों से की मुलाकात,
युवक की मौत के बाद परिजनों में आक्रोश के बीच बरगी विधायक मौके पर पहुंचे और परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिजनों की शिकायतें सुनीं और मामले में उचित कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। परिजन चाहते हैं कि पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मारपीट सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब इस मामले में परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जांच के निष्पक्ष नतीजों पर टिकी है।

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम, जांच में शामिल होंगे अहम बिंदु,
मामले की गंभीरता को देखते हुए युवक का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया गया। अब मजिस्ट्रियल जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि आकाश को किन परिस्थितियों में थाने लाया गया, उसकी तबीयत कब और कैसे बिगड़ी तथा अस्पताल पहुंचने से पहले क्या घटनाक्रम हुआ। थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों को समझने में मदद मिलेगी।

पुलिस का पक्ष भी सामने—तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने का दावा,
सीएसपी अखिलेश गौर के अनुसार, समिति के सदस्यों की शिकायत के बाद युवक को भीड़ के बीच सुरक्षा की दृष्टि से थाने लाया गया था। पुलिस का कहना है कि युवक नशे की हालत में प्रतीत हो रहा था। बाद में उसकी तबीयत खराब दिखने पर उसे एफआरवी वाहन से नेशनल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में न्यायिक जांच की मांग स्वीकार कर ली गई है।

अब जांच पर टिकी निगाहें—दोषी मिला तो कार्रवाई की उठी मांग,
आकाश चौधरी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिजन पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि युवक की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाया गया था। ऐसे में मजिस्ट्रियल जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज अहम भूमिका निभा सकते हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या मारपीट प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर आकाश चौधरी की मौत किन परिस्थितियों में हुई? अब मजिस्ट्रियल जांच से ही घटना की सच्चाई सामने आने और परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद है।