जबलपुर में संतान का सपना दिखाकर ₹50 हजार लेने का आरोप! इलाज, दवाइयों और पैसों की वापसी पर विवाद—महिला ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ लगाई गुहार
जिस उम्मीद के साथ इलाज शुरू कराया, उसी के बीच बिगड़ी तबीयत; अब पैसों की वापसी और कार्रवाई की मांग

जबलपुर। संतान प्राप्ति की उम्मीद हर दंपती के लिए भावनाओं से जुड़ा एक संवेदनशील विषय होता है। इसी उम्मीद के साथ इलाज कराने पहुंची जबलपुर की एक महिला ने अब गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। मामला हनुमानताल थाना क्षेत्र के कांचघर का है, जहां रहने वाली काजल दाहिया ने अग्रवाल मेडिकल स्टोर के संचालक सुनील अग्रवाल पर संतान प्राप्ति के इलाज के नाम पर 50 हजार रुपये लेने और दवाइयों को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं।
संतान की उम्मीद, 50 हजार रुपये खर्च करने का दावा
पीड़िता काजल दाहिया के आरोपों के मुताबिक, उसे जल्द संतान होने का भरोसा दिलाकर इलाज किया गया। महिला का दावा है कि इस दौरान उसने करीब 50 हजार रुपये खर्च किए। लेकिन इलाज से जुड़ी प्रक्रिया के बीच उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। महिला ने आरोप लगाया कि दवाइयां लेने के बाद उसे गर्भाशय में दर्द, सूजन और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों की वास्तविक वजह की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बिना नहीं की जा सकती।
पति की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर भी सवाल,
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उसके पति की मेडिकल रिपोर्ट को गलत बताकर दवाइयां दी गईं। अब सवाल यह है कि इलाज किस आधार पर किया गया, दवाइयां किसकी सलाह पर दी गईं और क्या इस संबंध में कोई चिकित्सकीय पर्चा या रिकॉर्ड उपलब्ध है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
पैसे वापस मांगे तो विवाद होने का आरोप,
काजल दाहिया का आरोप है कि इलाज पर खर्च हुई रकम वापस मांगने के लिए जब वह मेडिकल स्टोर संचालक के पास पहुंची, तो पैसे लौटाने से इनकार कर दिया गया। महिला ने दवाइयों का बिल नहीं देने, अभद्रता करने, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं। अब पीड़िता चाहती है कि उसकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब जांच से ही सामने आएगी सच्चाई,
यह मामला केवल 50 हजार रुपये की रकम का नहीं, बल्कि इलाज को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों और एक महिला की शिकायत का भी है। ऐसे मामलों में शिकायत की निष्पक्ष जांच, दवाइयों के रिकॉर्ड, भुगतान के प्रमाण और चिकित्सकीय दस्तावेजों की पड़ताल जरूरी है। साथ ही, संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
फिलहाल काजल दाहिया ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। अब देखना होगा कि शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं और जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं।

