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जबलपुर: लोकल ब्रेन-बाहरी गैंग की जोड़ी ने बजा दी बैंक की बैंड,मुख्य सरगना समेत चार गिरफ्तार, 1.83 लाख नगद और हथियार जब्त,वारदात के बाद चिरौंजी देकर अलग-अलग दिशाओं में भागे डकैत, 

जबलपुर। सिहोरा के खितौला स्थित इसाफ स्मॉल फाइनेंस बैंक में 11 अगस्त को हुई अब तक जिले के इतिहास में हुई सबसे बड़ी बैंक डकैती का पुलिस ने आंशिक पर्दाफाश कर दिया है। दरअसल इस पूरे कांड में लोकल ब्रेन-बाहरी गैंग की जोड़ी ने बैंक की बैंड बजा दी। वारदात के मास्टरमाइंड रहीस लोधी उर्फ रईस (पाटन उड़ना निवासी) और उसके तीन साथियों को पुलिस ने दबोच लिया है। इनके कब्जे से 1.83 लाख नगद, एक देसी कट्टा, चार जिंदा कारतूस, दो बाइक और चार मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। हालांकि बैंक में घुसकर सोना और नकदी लूटने वाले पांच नकाबपोश डकैत अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की एक विशेष टीम झारखंड रवाना कर दी गई है। खास बात यह हैं कि मास्टर माइंड होने के बावजूद डकैत रईस को दो लाख 20 हजार और मददगार बने बबलू को सिर्फ 25 हजार की चिरौंजी देकर भाग गए

रहीस बना वारदात का सूत्रधार-
जांच में सामने आया है कि बैंक डकैती की पूरी योजना का सूत्रधार रहीस लोधी था। उसने अपने स्थानीय साथियों सोनू बर्मन (इन्द्राना), हेमराज सिंह (पाटन उड़ना) और विकास चक्रवर्ती (दमोह) के साथ मिलकर झारखंड के पांच शातिर अपराधियों को इस वारदात के लिए बुलाया।

किराए के कमरे में बनी योजना-
डकैतों ने वारदात से पहले इन्द्राना कस्बे में किराये का मकान लिया और वहीं बैठकर पूरी साजिश रची। योजना इतनी पुख्ता थी कि वारदात के दौरान बैंक के अंदर घुसे बदमाशों ने मोबाइल फोन का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया, ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके।

झारखंड के पेशेवर डकैत है सभी-
पुलिस जांच में साफ हो गया है कि बैंक में दाखिल पांचों डकैत झारखंड के रहने वाले हैं और वारदात के बाद वहीं लौट गए। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने झारखंड में दबिश देने के लिए एक टीम रवाना की है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही पूरी गैंग गिरफ्त में होगी।

मददगार भी आए पुलिस की पकड़ में-
डकैती को अंजाम देने में स्थानीय मददगारों की भूमिका भी उजागर हुई है। आरोप है कि बबलू ठाकुर (पाटन उड़ना निवासी) ने डकैतों को ठिकाना और भागने में मदद की। हालांकि वह अभी फरार है, लेकिन पुलिस उसका पीछा कर रही है।

डकैतों पर इनाम और पुलिस का दावा-
फरार डकैतों पर पुलिस ने 30 हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गैंग ने वारदात के बाद लूटे गए सोने को आपस में बांट लिया है। पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही फरार आरोपी पकड़े जाएंगे और इस सनसनीखेज डकैती कांड का पटाक्षेप किया जाएगा।

यह था मामला-
11 अगस्त की सुबह बैंक खुलते ही हथियारबंद पांच डकैत हेलमेट और नकाब पहनकर बैंक में दाखिल हुए। उन्होंने कट्टों और अन्य हथियारों की नोक पर कर्मचारियों को बाथरूम में बंद कर दिया। फिर ऑपरेशन मैनेजर अंकित सोनी को धमकाकर लॉकर की चाबी खुलवाई। महज कुछ ही मिनटों में डकैत बैंक से 14 किलो 875 ग्राम सोना और 5.08 लाख नकद लेकर फरार हो गए। वारदात के वक्त मास्टरमाइंड रहीस लोधी बैंक के बाहर खड़ा होकर पूरी कार्रवाई पर नजर रख रहा था। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी दमोह पहुंचे और वहां से अलग-अलग दिशाओं की ट्रेनों में बैठकर फरार हो गए।

जेल में सुबोध से मिला रईस, बना प्लान-
पाटन का गांजा तस्कर रईस सिंह लोधी अब बैंक डकैती का मास्टरमाइंड बनकर सामने आया है। सूत्र बताते हैं कि उड़ीसा जेल में रहते हुए उसकी मुलाकात गैंगस्टर सुबोध सिंह के गुर्गों से हुई थी। वहीं से खितौला बैंक डकैती का ब्लूप्रिंट तैयार हुआ। जेल से छूटते ही रईस ने स्थानीय अपराधी बबलू सिंह को जोड़ा और गिरोह को जमीन मुहैया कराई। जबकि असली खेल सुबोध के गुर्गों ने खेला बैंक में घुसकर 14 किलो 875 ग्राम सोना और नकदी लूटी और भाग निकले। गौरतलब हैं कि रईस और सुबोध की सांठगांठ ने अपराध का नया गठजोड़ खड़ा कर दिया है। यह वारदात सिर्फ बैंक लूट नहीं, बल्कि पुलिस और सिस्टम को खुली चुनौती है। पुलिस की टीमें अब इस ‘क्रिमिनल अलायंस’ के धागे सुलझाने झारखंड और बिहार तक पहुंच चुकी हैं।

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