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डीजे प्रतिबंध को चुनौती और कथित अश्लील वीडियो से घिरे कछपुरा महाकाली समिति अध्यक्ष -संजय गुप्ता के नाम से वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल, आस्था की आड़ में नियमों की अनदेखी के आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर टिकी नजरें

जबलपुर। संस्कारधानी में धार्मिक आयोजनों की मर्यादा, प्रशासनिक नियमों के पालन और सार्वजनिक आचरण को लेकर कछपुरा महाकाली समिति के अध्यक्ष संजय गुप्ता का नाम विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर उनके नाम से दो अलग-अलग वीडियो वायरल होने की चर्चा है। एक वीडियो को डीजे प्रतिबंध के संबंध में प्रशासन को चुनौती देने वाला बताया जा रहा है, जबकि दूसरे को कथित अश्लील वीडियो के रूप में प्रसारित किया जा रहा है। इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इनके सामने आने के बाद समिति की भूमिका, धार्मिक आयोजनों की मर्यादा और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कथित अश्लील वीडियो से आस्था और सार्वजनिक आचरण पर बहस-
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित अश्लील वीडियो को पिछले वर्ष का बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इसमें संजय गुप्ता एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई देते हैं। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता, समय और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद वीडियो को लेकर शहर में चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोगों का कहना है कि धार्मिक समितियों से जुड़े पदाधिकारियों को सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। वहीं, किसी वायरल सामग्री को आधार बनाकर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय निष्पक्ष जांच की मांग भी जरूरी है।
डीजे प्रतिबंध पर कथित चुनौती ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता-
विवाद का दूसरा पहलू डीजे प्रतिबंध से जुड़ा है। कछपुरा महाकाली समिति के अध्यक्ष संजय गुप्ता का एक अन्य वीडियो वायरल होने का दावा किया जा रहा है। इसे डीजे पर प्रतिबंध के संबंध में चुनौतीपूर्ण बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि वीडियो में प्रतिबंधात्मक आदेशों की अवहेलना का संकेत मिलता है, तो प्रशासन के लिए उसकी जांच करना जरूरी हो जाता है। सवाल यह है कि जब प्रशासन नियम लागू करता है, तो क्या उनका पालन सभी धार्मिक समितियों और आयोजकों से समान रूप से कराया जाएगा? किसी पदाधिकारी का कथित प्रभाव या रसूख कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
पिछले साल प्रतिमा खंडित होने का घटनाक्रम भी चर्चा में-
कछपुरा महाकाली प्रतिमा से जुड़ा पिछले वर्ष का एक घटनाक्रम भी फिर चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डीजे लगाने के दौरान प्रतिमा खंडित होने की घटना हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को सूचना देकर प्रतिमा का विसर्जन कराया गया था। हालांकि, इस घटनाक्रम के विस्तृत तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पत्रकार संगठन और होटल से जुड़ाव का दावा भी चर्चा में-
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संजय गुप्ता स्वयं को एक पत्रकार संगठन तथा मेहता पेट्रोल पंप स्थित होटल के संचालन से जुड़ा बताते हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन को वायरल वीडियो के साथ संबंधित तथ्यों की भी निष्पक्ष पड़ताल करनी चाहिए।
अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार-
दोनों कथित वीडियो की सत्यता, उनके संदर्भ और डीजे प्रतिबंध से संबंधित लागू आदेशों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कदम उठाने का आधार अपुष्ट सोशल मीडिया सामग्री नहीं, बल्कि सत्यापित तथ्य और विधिसम्मत प्रक्रिया होनी चाहिए।
अब सवाल केवल वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि नियमों के समान पालन और प्रशासनिक जवाबदेही का है। जिला प्रशासन और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में जांच या कार्रवाई की दिशा क्या होगी।