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निर्दय हत्या का आरोपी कल्याण सिंह आजीवन सश्रम कारावास से दंडित,जघन्य वारदात में अपर सत्र न्यायालय पाटन का सख्त फैसला, पत्नी-परिजनों पर कुल्हाड़ी से किया था जानलेवा हमला

जबलपुर। घरेलू विवाद के चलते निर्दयता की सारी हदें पार कर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने कठोर सजा सुनाते हुए समाज को स्पष्ट संदेश दिया है कि जघन्य अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अपर सत्र न्यायाधीश पाटन श्रीमान ओमप्रकाश रजक की अदालत ने थाना चरगंवा के बहुचर्चित एवं सनसनीखेज सत्र प्रकरण क्रमांक 439/2021 में अभियुक्त कल्याण सिंह को हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास सहित विभिन्न धाराओं में दंडित किया है।

न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 302 भादवि के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं 2000 रुपये अर्थदंड, धारा 324 भादवि में 6 माह का कारावास व 500 रुपये अर्थदंड तथा धारा 307 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।

क्या है पूरा मामला-
अभियोग पत्र के अनुसार, दिनांक 29 दिसंबर 2020 को ग्राम हीरापुर में झगड़े की सूचना पर थाना चरगंवा पुलिस मौके पर पहुंची। फरियादी पन्नालाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी चचेरी बहन गुड्डी बाई का विवाह आरोपी कल्याण सिंह से हुआ था। पारिवारिक विवाद के चलते आरोपी अपनी पत्नी के साथ लगातार मारपीट करता था। 28 दिसंबर की रात भी आरोपी ने गुड्डी बाई के साथ बेरहमी से मारपीट की थी।

घटना के कुछ समय बाद आरोपी के पुत्र शिवम ने फोन कर बताया कि उसके पिता ने दवाई पी ली है और वह कमरे में पड़ा है। इस सूचना पर पन्नालाल, उसके परिजन और महिलाएं आरोपी के घर पहुंचे। बातचीत के दौरान आरोपी अचानक उग्र हो गया और अश्लील गालियां देते हुए कमरे से लोहे की कुल्हाड़ी ले आया।

आरोपी ने जान से मारने की नीयत से कल्लू बाई पर कुल्हाड़ी से हमला किया। बीच-बचाव करने आए पन्नालाल पर भी उसने वार कर गंभीर चोट पहुंचाई। इसी दौरान परिजन जान बचाकर भागे। भागते समय रज्जू गिर पड़ा, जिस पर आरोपी ने उसकी गर्दन और सिर पर कुल्हाड़ी से कई वार कर उसकी मौके पर ही हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया।

पुख्ता विवेचना, सटीक साक्ष्य बने सजा की आधारशिला-
घटना के आधार पर थाना चरगंवा में अपराध क्रमांक 418/2020 अंतर्गत धारा 294, 307, 302, 506/2 भादवि में मामला दर्ज किया गया। विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई रितेश पांडेय द्वारा की गई। वैज्ञानिक, सटीक एवं मजबूत साक्ष्य संकलन के आधार पर अभियोजन ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।

न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए कठोर दंड सुनाया। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।

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