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श्रीराम कॉलेज के कथित फीस घोटाले की खुलेगी परत-दर-परत पोल, नए कलेक्टर के सामने उठेगा मामला

58 लाख रुपये की कथित फीस अनियमितता पर नए सिरे से जांच की मांग, कॉलेज प्रबंधन पर तथ्यों को छिपाने और लीपापोती करने के आरोप, संचालकों की भूमिका की भी जांच कराने पर जोर

जबलपुर। शहर के विवादित श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज में कथित फीस घोटाले और अन्य अनियमितताओं का मामला अब नए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के समक्ष उठाने की तैयारी है। रेवा शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस कॉलेज पर लगे गंभीर आरोपों की नए सिरे से पड़ताल कराने की मांग के बीच कॉलेज प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छात्रों की फीस से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से लेकर कर्मचारियों के शोषण और नियमों की अनदेखी तक के मामलों में अब तक पूरी जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर 58 लाख रुपये की कथित फीस अनियमितता के मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कब होगी?

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन के समक्ष नए तथ्य और जांच के नए बिंदु रखने की तैयारी की है। उनका दावा है कि पूर्व में हुई जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने नहीं आने दिया गया। अब इन बिंदुओं को नए कलेक्टर के संज्ञान में लाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी।

एसडीएम अधारताल की जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें-
पूर्व कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम अधारताल के नेतृत्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट अभी प्रस्तुत होना बाकी है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जांच के दौरान कॉलेज प्रबंधन से जुड़ी कई कथित लापरवाहियां सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में किन तथ्यों को शामिल करती है और प्रशासन उस पर क्या कार्रवाई करता है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि केवल औपचारिक जांच तक मामला सीमित न रहे, बल्कि फीस के लेनदेन, रिकॉर्ड और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की जाए।

58 लाख की फीस अनियमितता में संचालकों की भूमिका पर सवाल-
एमपीएसयू संगठन के अध्यक्ष एवं शिकायतकर्ता अभिषेक पांडेय का आरोप है कि विद्यार्थियों के साथ 58 लाख रुपये की फीस अनियमितता के मामले में केवल वित्त शाखा के कर्मचारियों की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं है। उनका दावा है कि कॉलेज के डायरेक्टर आरके करसौलिया सहित अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पांडेय की मांग है कि जांच में यदि छात्रों के साथ धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरके करसौलिया पर लगाए गए अन्य गंभीर आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

कर्मचारियों के शोषण से लेकर छात्र हितों तक उठेंगे सवाल-
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कॉलेज में कुछ कर्मचारी कथित रूप से शोषण का सामना कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के भय से खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। इसके अलावा फीस संबंधी नियमों और छात्र हितों से जुड़े अन्य मामलों में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे इन सभी बिंदुओं को दस्तावेजों के साथ प्रशासन के समक्ष रखेंगे। अब निगाहें नए कलेक्टर पर हैं कि वे इस पूरे मामले में कितनी गंभीरता से संज्ञान लेते हैं।

वास्तविकता सिद्ध करेगी जवाबदेही-
यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रहने के बजाय जिम्मेदारी तय करने के व्यापक दायरे में होनी चाहिए। फिलहाल, जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई ही तय करेगी कि श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े इन आरोपों की वास्तविकता क्या है और जवाबदेही किसकी बनती है।

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