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सकारात्मक पहल:पॉलीथिन को न खाएं गायें इसलिए उनका लंप बनाकर बेच रहे, अब यह स्टार्टअप लोगों को भी सिखा रहे निहाल

शहर में गाय कचरे के साथ पॉलीथिन भी खा जाती हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है। शहर का एक युवक कचरे में से पॉलीथीन को अलग करने के साथ बेच भी रहा है, इससे पॉलीथीन गाय के पेट में जाने से बच रही है। इस पॉलीथिन को लंप (पॉलीथिन का ठाेस रूप) बनाकर आगरा में कई तरह के ब्रश बनाने वाली कंपनियों को भेजा जा रहा है।

यह करने वाले हैं जौरासी के निहाल सिंह चौहान। उन्होंने सितंबर में जौरासी क्षेत्र में कचरे से सेग्रीगेशन और पुरानी छावनी में सिंगल यूज पॉलीथिन से लंप बनाने काम शुरू किया। वह रोज लगभग 1500 किलो पॉलीथिन का लंप बनाते हैं। इससे वह ग्रामीणों को भी जोड़ रहे हैं।

ऐसे बनता है लंप

चौहान पॉलीथिन और इसके साथ का कचरा 2 रुपए किलो में खरीदते हैं, इसके बाद इसका सेग्रीगेशन किया जाता है। इसके बाद निकली पॉलीथिन की कीमत 6 रुपए किलो हो जाती है। इस पॉलीथिन का ट्रीटमेंट कर लंप बनाया जाता है। 500 किलो पॉलीथिन और 20% टिहोली (पत्थर से बना रेत) के साथ ट्रीटमेंट कराया जाता है। 8 घंटे की प्रोसेस के बाद लंप तैयार हो जाता है। इसे 12रु. किलो में आगरा की फैक्ट्रियों में भेजा जाता हैं।

सीवर चोक भी नहीं होंगे

पॉलीथिन खाने से गाय बीमार होती हैं और सीवर जाम की समस्या भी आती है, इसलिए यह काम शुरू किया है और लोगों को भी इस स्टार्ट अप के लिए प्रेरित कर रहे हैं। – निहाल सिंह चौहान

सिंगल यूज पॉलीथिन को सिस्टम से हटाने का यह अच्छा तरीका है लेकिन यह ख्याल रखना होगा कि ट्रीटमेंट के दौरान निकलने वाली कार्बन और कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस रिहायशी क्षेत्र से दूर रहे।

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