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नए DGP की नियुक्ति का प्रस्ताव MP में ही अटका:अभी उच्चस्तर पर ही चल रहा मंथन, अगले महीने पूरा हो जाएगा पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी का कार्यकाल

मध्यप्रदेश में अगला पुलिस महानिदेशक कौन होगा, इसको लेकर अभी उच्चस्तर पर ही मंथन चल रहा है। वर्तमान डीजीपी विवेक जौहरी के कार्यकाल को खत्म होने में अब एक महीने का समय भी नहीं बचा है। बावजूद इसके नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव अभी तक यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन UPSC को नहीं भेजा जा सकता है। आमतौर पर राज्य सरकार द्वारा डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को आईपीएस अफसरों के नाम का पैनल तीन महीने पहले भेज दिया जाता है।

सोशल मीडिया पर पैनल यूपीएससी को भेजे जाने की सूचना वायरल हो रही है। इसका गृह मंत्रालय ने खंडन किया है। गृह विभाग के एसीएस राजेश राजौरा ने कहा कि डीजीपी के लिए नामों की जानकारी यूपीएससी को भेजे जाने का प्रकरण उच्च स्तर पर विचाराधीन है। इसलिए यूपीएससी को नामों का पैनल अभी प्रेषित नहीं किए गए हैं। सोशल मीडिया पर इससे विपरीत प्रसारित की जा रही जानकारी तथ्यहीन है।

आईपीएस सुधीर सक्सेना रेस में आगे

वर्तमान डीजीपी विवेक जौहरी का कार्यकाल 4 मार्च को पूरा होने वाला है। सूत्रों के अनुसार नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर फाइल मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर पर ही मूवमेंट पर है। मप्र का डीजीपी बनने की रेस में 1987 बेच के आईपीएस अधिकारी सुधीर सक्सेना और पवन जैन का नाम सबसे आगे चल रहा है। सक्सेना वर्तमान में दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं पवन जैन डीजी होमगार्ड्स हैं।

30 वर्ष की सेवाएं पूरी कर चुके अफसरों के नाम भेजे जाते हैं

राज्य सरकार द्वारा 30 वर्ष की सेवाएं पूरी कर चुके आईपीएस अफसरों के नाम यूपीएससी को भेजे जाते हैं। इसमें उन सभी अफसरों के नाम भेजे जाते हैं, जिनकी सेवाएं न्यूनतम 6 महीने शेष हों। इसके बाद दिल्ली से प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति का आदेश जारी करेगी। सरकार द्वारा भेजी गई वरिष्ठता के आधार पर यूपीएससी तीन आईपीएस अधिकारियों के नाम का पैनल राज्य सरकार को वापस भेजती है। इससे से किसी एक को डीजीपी नियुक्त किया जाता है।

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