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20 सेकेंड में 62 साल पुराना CPA खत्म:CM शिवराज की नाराजगी पड़ी भारी; सिर्फ 8% सड़कों का था जिम्मा; क्यों बंद हुआ- पढ़िए पूरी कहानी

भोपाल की खराब सड़कों को लेकर नपे 62 साल पुराने CPA (राजधानी परियोजना प्रशासन) का इतिहास सिर्फ 20 सेकंड में खत्म हो गया। CM शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी CPA को भारी पड़ी। यही कारण रहा कि राजधानी की 8% सड़कों की देखरेख करने वाला CPA अब 3 विभागों में बंट गया। PWD, वन विभाग और भोपाल गैस राहत एवं पुर्नवास विभाग इसके कामकाज को देखेगा। सबसे बड़ी जिम्मेदारी PWD को दी गई हैं। बिल्डिंगों और सड़कों की देखरेख यही विभाग करेगा।

सड़कों के मुद्दे पर करीब 6 महीने पहले 20 अगस्त को सीएम चौहान ने मंत्रालय में बड़ी मीटिंग बुलाई थी। इसी दौरान उन्होंने सीपीए को खत्म करने के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद प्रस्ताव बने और कई बैठकें हुईं। अब कैबिनेट में मंजूरी का ठप्पा लगते ही सीपीए इतिहास बन गया।

सरकार के दामन पर दाग बनी थीं सड़कें
पिछले साल बारिश के दौरान राजधानी की सड़कें सरकार के दामन पर दाग बन गई थी। 50% सड़कें ऐसी थीं, जो बारिश में उखड़ चुकी थी। कोलार, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, कमला पार्क, हमीदिया रोड समेत कई सड़कें गड्‌ढों में तब्दील हो गई थी। इस कारण सियासत गरमा चुकी थी और कांग्रेसी सरकार को घेर रहे थे।

कई ऑइकानिक प्रोजेक्ट दिए, पर सड़कों से नप गया
ऐसा नहीं है, सीपीए सिर्फ सड़कों का काम ही देखता था। नए शहर को खूबसूरती देने में उसकी बड़ी भूमिका रही है। नए मंत्रालय एनेक्सी बनाने से लेकर VIP रोड जैसे कई बड़े काम उसने ही किए हैं। भारत, भवन, शौर्य स्मारक, ट्राइबल म्यूजियम, मानव संग्रहालय, टीटी नगर स्टेडियम, सतपुड़ा, विध्यांचल आदि इमारतें भी सीपीए ने बनाई है। शहर को कई ऑइकानिक प्रोजेक्ट देने के बावजूद वह खराब सड़कों की भेंट चढ़ गया।

यह काम था CPA का
शहर को व्यवस्थित तरीके से डेवलप करने के लिए 1 जून 1960 में आवास एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत CPA का गठन किया गया था। इसका काम भोपाल शहर की सड़कों को बनाना और उनका मेंटेनेंस करना था। इसके अलावा, उसके जिम्मे पर उद्यान, बिल्डिंग निर्माण, पुल-पुलियाएं बनाने आदि के काम भी आ गए। वीआईपी रोड से लेकर एनेक्सी भी सीपीए ने ही बनाए। हालांकि, एनेक्सी को लेकर सीपीए के अफसर कई बार रडार पर आ चुके थे।

सात बड़े पार्क भी बनाए

इसके अलावा 132 एकड़ में सात बड़े पार्क बनाए। इनमें एकांत, प्रियदर्शनी, मयूर, चिनार, प्रकाश तरण पुष्कर आदि शामिल हैं। अभी सड़क, बिल्डिंग, पार्क समेत छोटे-बड़े 250 से ज्यादा प्रोजेक्ट चल रहे थे, जो अब पीडब्ल्यू और वन विभाग के जिम्मे आ गए हैं।

92% सड़कें नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और बीडीए की, 8% ही हिस्सा सीपीए का
शहर में 92% सड़कें नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और बीडीए की है। सिर्फ 8% ही हिस्सा सीपीए का था। उनमें भी कई सड़कें बेहतर स्थिति में थी। बावजूद सड़कों के मुद्दे पर सीपीए नप गया। अब उसकी सड़कें पीडब्ल्यूडी संभालेगा। इसे लेकर खाका तैयार कर लिया गया है।

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