MP में जन्मे हैं ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर:ग्वालियर में पले-बढ़े, भोपाल में फैमिली; दोस्त बोले- बचपन में हम साथ सितौलिया और छुपाछिपी खेलते थे
इन दिनों फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ जमकर चर्चा में है। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर बनी इस फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री का MP के ग्वालियर शहर से पुराना कनेक्शन है। वे यहां की जवाहर कॉलोनी में पले-बढ़े हैं। यहां की गलियों, मैदानों पर वे पत्थर की गोटियों से सितौलिया और कबड्डी खेला करते थे। उनके बचपन के दोस्तों का कहना है कि डायरेक्शन देने का शौक तो उसे बचपन से था, लेकिन वह इतनी कामयाबी पा लेगा, यह सोचा नहीं था। कोई भी बात होती, तो वह हम दोस्तों को डायरेक्शन देने लगता था।
विवेक के बचपन के दोस्त IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के पूर्व जिला अध्यक्ष व बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुल तिवारी बताते हैं-
विवेक को बचपन से जानता हूं। मैं लद्दाराम के अखाड़े में रहता था। चंद कदम दूर जवाहर कॉलोनी में किराए के मकान में विवेक का परिवार रहता था। विवेक के पिता प्रभुदयाल अग्निहोत्री तत्कालीन विक्टोरिया कॉलेज (अब MLB कॉलेज) में संस्कृत के प्रोफेसर हुआ करते थे। विवेक की मां प्रभु अंकल की दूसरी पत्नी थीं। पहली पत्नी से उन्हें एक बेटा था, जाे शायद उस समय USA में था।
विवेक और उसकी बड़ी बहन मुनिया, कॉलोनी के दूसरे बच्चों के साथ खेला करते थे। हम लोग ज्यादातर सितौलिया और छुपाछिपी खेलते थे। यह बात 1968 से 1970 के बीच की है। इसके बाद उनके पिता भोपाल शिफ्ट हो गए। वहां उनका परिवार अरेरा कॉलोनी में रहता है। 22 साल पहले सन् 2000 में जब विवेक की मां का देहांत हुआ था, तब वह उनसे मिले थे। इसके बाद से बातचीत नहीं हुई।
मुंबई जाकर एड बनाए, फिल्म जगत में बनाई पहचान
1971 में विवेक के पिता डॉ. प्रभुदयाल अग्निहोत्री डायरेक्टर ऑफ हिन्दी ग्रंथ अकादमी बनकर ग्वालियर से भोपाल पहुंचे। इसके बाद उन्हें भोपाल यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर बना दिया गया। 1974 में मेरा पूरा परिवार उनके परिवार से मिलने के लिए उनके भोपाल स्थित घर पर गया था। तब उनसे मुलाकात हुई थी। इसके बाद 1980 में उनके घर फिर जाना हुआ। उस वक्त पता चला कि वह मुंबई में रहता है और वह एड फिल्म बनाने का काम करने लगा है। उसने दिल्ली से मास कम्युनिकेशन एंड एडवरटाइजमेंट का कोर्स किया है। उस वक्त घर पर उसकी बहन मुनिया व पिता प्रभुदयाल मिले थे। पिता सेवानिवृत हो चुके थे।
विवेक के पिता उत्तरप्रदेश के धनोरा गांव के रहने वाले कान्यकुब्ज ब्राह्मण हैं। उन्होंने ग्वालियर में रहकर पढ़ाई की और यहीं पर उन्हें MLB कॉलेज में नौकरी मिल गई थी। 1990 में पता चला कि विवेक का विवाह टीवी कलाकार पल्लवी जोशी से हो गया है। इसके बाद ही उन्होंने मुंबई की फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
‘गलियों में जाता हूं तो विवेक की याद आ जाती है’
डॉ. तिवारी का कहना है कि आज भी जब कभी वे जवाहर कॉलोनी की गलियों से कार लेकर गुजरते हैं, तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। विवेक काफी सॉफ्ट नेचर का बच्चा था। वह कम ही लोगों से मिलता जुलता था, लेकिन मुझसे उसकी अच्छी दोस्ती थी। करीब 30 सालों से मैंने उसे सामने से नहीं देखा है। 2008 में विवेक के पिता का भी देहांत हो गया।



