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द कश्मीर फाइल्स:IAS अफसर नियाज खान बोले- मैं इस फिल्म के खिलाफ नहीं, गोधरा कांड, मालेगांव ब्लास्ट पर भी तो फिल्म बने

‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर विवादों में घिरे मध्य प्रदेश के IAS अफसर नियाज खान ने फिर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, ‘मैं इस फिल्म का विरोधी नहीं, लेकिन देश की आवाम में हिंसक घटनाओं पर संवेदनाएं जगाने के लिए गोधरा कांड, भागलपुर कांड पर भी फिल्में बननी चाहिए।’ इधर, लगातार बयानबाजी के बाद वे प्रदेश सरकार की निगाह में चढ़ चुके हैं। इस मामले पर उनसे जवाब मांगा जा सकता है। उनकी बयानबाजी को लेकर.

सवाल- ‘द कश्मीर फाइल्स’ से आपको दिक्कत क्या है? जो फिल्म के सपोर्ट में हैं, आप उनकी भी आलोचना कर रहे हैं? नियाज- मैं फिल्म के खिलाफ नहीं हूं। मैं भी फिल्म के सपोर्ट में हूं। फिल्म अच्छी बनी है जो ब्राह्मणों के दर्द को दिखाती है और दिल को छूती है। मैंने जो बयान दिया है, वह लॉजिकल है। इस तरह की फिल्में बनानी चाहिए। मैं तो यह कहता हूं कि देश के हर हिस्सों में इस तरह की घटनाओं पर फिल्म बने, ताकि लोगों में संवेदनाएं आएं। गोधरा कांड, भागलपुर कांड, मुंबई व मालेगांव बम ब्लास्ट और गुजरात दंगे हुए हैं। जगह-जगह मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं, इन पर भी फिल्म बननी चाहिए।

सवाल- आमिर खान ने फिल्म की तारीफ की, तो आपने उन्हें भी निशाने पर ले लिया?
नियाज- 
आमिर खान से उतना ही कहना है कि उन्हें विवेक अग्निहोत्री से यह कहना चाहिए कि इस फिल्म से हुई कमाई को ब्राह्मणों के हित में खर्च करें।

सवाल- क्या आपने फिल्म देखी है?
नियाज- 
यह फिल्म मैंने अभी तक नहीं देखी है। इसकी कहानी पढ़ चुका हूं, क्योंकि मैं इंग्लिश नॉवेलिस्ट हूं। मैं केवल हॉलीवुड की ही फिल्में देखता हूं। बॉलीवुड की फिल्में मैंने कई सालों से नहीं देखी हैं।

सवाल-​​​​​​​ इस फिल्म में आपको गलत क्या लगा? कश्मीर पर पहले भी फिल्म बनी हैं, तब विरोध नहीं किया?नियाज- कश्मीर को लेकर जरूर फिल्में बनी होंगी। मैं फिर कहता हूं कि मैं हिंदी फिल्में नहीं देखता। ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म जिस तरह से देश में चल रही है, इस कारण ध्यान गया और मैंने रिएक्शन दिया है।

सवाल-​​​​​​​ आपने कहा कि द कश्मीर फाइल्स की कमाई शिक्षा के लिए दान करें। इससे पहले भी फिल्मों से रिकाॅर्ड कमाई हो चुकी है, तब ऐसा क्यों नहीं कहा था?
नियाज- 
मैंने यह बात इसलिए कही, क्योंकि कश्मीरी ब्राह्मणों पर लगातार जुल्म हुआ, लेकिन उनके जख्मों को बार-बार कुरेदा जा रहा है। इस फिल्म में भी कश्मीरी ब्राह्मणों के जख्म को कुरेदा गया, जबकि जरूरत उनके साथ सहानुभूति दिखाने की है। उन्हें वापस कश्मीर में बसाया जाए, जो अभी तक दिखाई नहीं पड़ता है।

सवाल-​​​​​​​ ​​​​​​​MP सरकार फिल्म के समर्थन में है। असम में तो हॉफ डे छुट्‌टी का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री तक फिल्म की तारीफ कर चुके हैं?
नियाज- 
सरकार यह फिल्म दिखा रही है, दिखाना चाहिए और देखना भी चाहिए। मेरा इस फिल्म को लेकर किसी भी तरह का विरोध नहीं है।

सवाल-​​​​​​​ आपने नॉवेल अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम पर किताब लिखी। आपकी जितनी किताबें हैं, वह धर्म विशेष पर आधारित क्यों हैं?
नियाज- 
यह कहना बिल्कुल गलत है। मेरी 7 किताबें हैं, जो हर धर्म को लेकर लिखी गई हैं। इसमें हिंदू भी शामिल है। हाल ही में एक पुस्तक यहूदियों पर लिखी है, जिसमें यहूदियों और हिंदुओं को समान विचारधारा का बताया गया है। मेरी किताबों में अधिकांश कैरेक्टर हिंदू ही है, इसलिए यह कहना गलत है कि मैं किसी धर्म विशेष के लिए लिखता हूं।

सवाल-​​​​​​​ खान सरनेम से आपको डर क्यों लगता है? क्या आपके साथ कोई घटना घटी या फिर भेदभावपूर्ण प्रशासनिक अनुभव इसकी वजह है?
नियाज- 
बिल्कुल, मुझे खान नाम से डर लगता है। मैं कई मौकों पर यह महसूस करता हूं कि मेरे सरनेम में खान लिखे जाने के कारण इसका खामियाजा मुझे भोगना पड़ता है और भोगना भी पड़ा है।

सवाल-​​​​​​​ आपने अपना हीरो सोनू सूद और नाना पाटेकर को बताया है। कोई खास वजह‌?
नियाज- 
यह दोनों अभिनेता मेरे रोल मॉडल हैं। उसकी वजह यह है कि यह जब भी कोई बात कहते हैं या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामाजिक मुद्दों पर अपना व्यू रखते हैं तो वह मुझे छू जाता है। कोरोना काल में पूरे देश ने देखा कि सोनू सूद ने किस तरह से काम किया।

सवाल-​​​​​​​ फिल्म के विरोध में आपका समर्थन सिर्फ दिग्विजय सिंह ने किया। कांग्रेस भी इस मुद्दे पर चुप है?
नियाज- 
किसी राजनीतिक दल की विचारधारा से मेरा लेना-देना नहीं है। मुझे जो सही लगा, वह सोशल मीडिया में देश की जनता के साथ शेयर किया है।

सवाल-​​​​​​​ जिस तरह से सोशल मीडिया पर आप आलोचना करते हैं, क्या यह DOPT की सिविल सर्वेंट के लिए बनाई आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है?
नियाज- 
यह पूरी तरह से अभिव्यक्ति की आजादी का मामला है। मुझे अधिकार है अपनी बात कहने का और लोगों की बात सुनने का। रहा सवाल सिविल सर्वेंट आचार संहिता का तो मैंने इसका बिल्कुल भी उल्लंघन नहीं किया है।

सवाल-​​​​​​​ पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और अब गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि IAS अफसर नियाज खान को नोटिस दिया जाएगा, इस पर क्या कहेंगे‌?
नियाज- 
सरकार को लगता है तो वह मुझे नोटिस देगी। हालांकि, मुझे अभी तक इस तरह का कोई नोटिस मिला नहीं है। यदि मिलेगा तो इसका जवाब दे दिया जाएगा।

सवाल-​​​​​​​ आपने कहा कि प्रधानमंत्री मेरी पोस्टिंग कश्मीर में कर दें, आपने इसके लिए सरकार में आवेदन किया है?
नियाज- 
बिल्कुल सही है… मैं कश्मीर में पदस्थ होना चाहता हूं। सरकार यदि मेरी पोस्टिंग कश्मीर में करती है, तो मैं उन कश्मीरी ब्राह्मणों को वापस कश्मीर में बसाने के लिए काम करूंगा। शायद ही कोई अफसर होगा, जो इस तरह से आगे आकर काम करेगा। मेरी दिली इच्छा है कि सरकार मुझे कश्मीर में पदस्थ कर दें।

सवाल-​​​​​​​ आपने यहां तक कहा कि मैं नौकरी छोड़कर राजनीति में भी उतर सकता हूं, क्या यह आपका गंभीर निर्णय है?
​​​​​​​नियाज- 
मैं इस बारे में सोच रहा हूं, लेकिन इसके लिए सही वक्त अभी नहीं है। आप उदाहरण देख लीजिए अरविंद केजरीवाल आयकर ऑफिसर थे। उन्होंने नौकरी छोड़ी और आरटीआई एक्टिविस्ट बने। उन्होंने धरने-आंदोलन किए। फिर मजबूरी में उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा। यही वजह है कि आज भी वह देश में राजनीतिक दलों के बीच खड़े होकर जनता की बात कर रहे हैं।

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