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बरेला में ट्रक काटने का खेल बेनकाब! गैस कटर से कबाड़ बनाने की तैयारी, थाना प्रभारी संगीता सिंह की कार्रवाई से मचा हड़कंप

वाहन मालिक की अनुमति के बिना 2 लाख रुपये में सौदा करने का आरोप, मौके से आधा कटा ट्रक और 9 गैस सिलेंडर बरामद

जबलपुर। जबलपुर के बरेला थाना क्षेत्र में ट्रक को गैस कटर से काटे जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। ग्राम पहाड़ी खेड़ा स्थित एक पोल्ट्री फार्म के पास ट्रक को काटकर कबाड़ में तब्दील करने का प्रयास किए जाने का आरोप है। वाहन मालिक की शिकायत पर थाना प्रभारी संगीता सिंह के नेतृत्व में बरेला पुलिस ने मौके पर कार्रवाई की। पुलिस को घटनास्थल से आधा कटा ट्रक, आठ ऑक्सीजन सिलेंडर, एक इंडियन गैस सिलेंडर और काटने में इस्तेमाल होने वाले औजार मिले।

मालिक की अनुमति के बिना ट्रक का सौदा कैसे हुआ?
मामला ट्रक क्रमांक MP 17 HH 3470 से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, वाहन मालिक की जानकारी और अनुमति के बिना ट्रक का दो लाख रुपये में कबाड़ी से सौदा किए जाने का आरोप है। इस मामले में पोल्ट्री फार्म संचालक शिवराम साहू, साजिद अली उर्फ झटका, विजय कोरी और राजिम शाह के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि गैस कटर की मदद से ट्रक को काटा जा रहा था। अब सवाल यह है कि आखिर वाहन मालिक की अनुमति के बिना ट्रक का सौदा किस आधार पर किया गया?

ट्रक को आधा कटा देखकर मालिक के उड़े होश,
बताया जा रहा है कि जब वाहन मालिक को ट्रक काटे जाने की जानकारी मिली, तो वह तत्काल ग्राम पहाड़ी खेड़ा पहुंचा। वहां अपने ट्रक को आधा कटा देखकर वह हैरान रह गया। इसके बाद उसने बरेला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की।

मौके से सिलेंडर, गैस कटर के उपकरण और अन्य सामान बरामद,
पुलिस की कार्रवाई के दौरान मौके से आधा कटा ट्रक, आठ ऑक्सीजन सिलेंडर, एक इंडियन गैस सिलेंडर, हथौड़ा, पाना, प्लास, लोहे की रॉड सहित अन्य सामान बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन उपकरणों की मौजूदगी से ट्रक काटे जाने का मामला गंभीर हो गया है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

थाना प्रभारी संगीता सिंह के नेतृत्व में बरेला पुलिस की कार्रवाई,
इस मामले में थाना प्रभारी संगीता सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की। टीम में उपनिरीक्षक वीरेंद्र उईके, सहायक उपनिरीक्षक मुकेश पठारिया, प्रधान आरक्षक मुकेश मसराम, आरक्षक सिद्धार्थ दुबे तथा सैनिक भगवान दास और रामकुमार ठाकुर शामिल रहे। पुलिस घटनास्थल से मिले सामान और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

सबसे बड़ा सवाल: ट्रक काटने की अनुमति किसने दी?
इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वाहन मालिक की अनुमति के बिना ट्रक का सौदा कैसे हुआ? ट्रक को गैस कटर से काटने का फैसला किसने लिया? क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

फिलहाल बरेला पुलिस मामले की जांच में जुटी है। अब देखना होगा कि जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है और कथित सौदे में शामिल लोगों की भूमिका क्या सामने आती है।

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