रसल चौक में रात 1 बजे तक शराब का खेल! ठेकेदारों की मनमानी या आबकारी विभाग की मेहरबानी? कुंभकर्णी नींद में जिम्मेदार!
कानून को खुली चुनौती, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

जबलपुर के रसल चौक स्थित शराब दुकान को लेकर देर रात तक शराब बिक्री और निर्धारित कीमत से अधिक वसूली के आरोप सामने आए हैं। दावा है कि रात करीब 1 बजे दुकान का शटर नीचे होने के बावजूद उसके नीचे से शराब बेची जा रही थी। इस दौरान कीमत को लेकर विवाद होने और वीडियो वायरल होने की बात भी सामने आई है। यदि आरोप सही हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नियमों की निगरानी कौन कर रहा है?
ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम कौन लगाएगा?
शराब दुकान संचालकों पर नियमों के उल्लंघन और कथित ओवररेटिंग के आरोप लगते हैं, लेकिन कार्रवाई को लेकर जनता के मन में सवाल बने रहते हैं। क्या संबंधित ठेकेदारों को नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी तय की गई है? क्या दुकान पर निर्धारित दरों की नियमित जांच होती है? यदि तय समय के बाद शराब बिक्री हो रही है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल,
रसल चौक की कथित घटना ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता पूछ रही है कि क्या विभाग की टीम नियमित निरीक्षण कर रही है या शिकायतों के बाद ही सक्रिय होती है? अगर रात 1 बजे शराब बिक्री और ओवररेटिंग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केवल कागजी कार्रवाई से नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं होगा।
प्रशासन से सीधे सवाल,
क्या वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच होगी? क्या शराब दुकान के सीसीटीवी फुटेज, बिक्री के समय और रेट लिस्ट की पड़ताल की जाएगी? क्या संबंधित ठेकेदार से जवाब मांगा जाएगा? और सबसे बड़ा सवाल—यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो आबकारी विभाग जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करेगा?
जबलपुर की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोप सही मिलने पर दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और शराब बिक्री के निर्धारित समय तथा कीमतों का सख्ती से पालन कराया जाए। कानून सबके लिए समान है—ठेकेदार हो या अधिकारी, जवाबदेही तय होनी चाहिए।



