स्मार्ट सिटी अस्पताल की आड़ में चिटलरी का जाल,वाहन हड़पने से लेकर फर्जी एक्सीडेंट तक, पुराने आरोपों में घिरे अमित खरे पर फिर गंभीर शिकंजा
जबलपुर। स्मार्ट सिटी अस्पताल के संचालक कुख्यात चिटलर अमित खरे के खिलाफ एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस बार मामला भोले-भाले ग्रामीण को मरीज दिखाने के बहाने बुलाकर उसकी वैन हड़पने, फर्जी सड़क दुर्घटना रचने और बीमा धोखाधड़ी में फंसाने की साजिश से जुड़ा है। पीड़ित शिवलाल मल्लाह, निवासी ग्राम बिलपठार, ने पूरे मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें संगठित गिरोह की कार्यप्रणाली उजागर होने का दावा किया गया है। समाजवादी पार्टी के आशीष मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस कप्तान संपत उपाध्याय को लिखित शिकायत में पीड़ित ने आरोप लगाया गया कि उसके परिचित अमित खरे ने उसे स्मार्ट सिटी अस्पताल में मरीज देखने के बहाने अपनी वैन (MP20 BA 6728) सहित बुलाया। इसके बाद कुंडम ले जाकर योजनाबद्ध तरीके से वाहन अपने कब्जे में ले लिया गया। आरोप है कि इसके बाद जानबूझकर वाहन का एक्सीडेंट कराया गया और शिवलाल पर दबाव बनाया गया कि वह पुलिस को झूठी सूचना देकर दुर्घटना अपने नाम पर दर्ज कराए। जब उसने इनकार किया तो उसे धमकाया गया।
छह माह से पीड़ित की वैन खड़ी-
सूत्रों के अनुसार, एक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर की सतर्कता के चलते फर्जी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी, जिससे आरोपियों की योजना विफल हो गई। इसके बावजूद बीते छह माह से पीड़ित की वैन अवैध रूप से रोकी गई है, जो वर्तमान में कुंडम थाने में खड़ी है। वाहन छुड़वाने के लिए पीड़ित लगातार थाने और अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका।

पूर्व में भी लग चुके गम्भीर आरोप-
गौरतलब है कि अमित खरे पर इससे पूर्व भी चिटलरी बीमा धोखाधड़ी और संदिग्ध दुर्घटनाओं से जुड़े कई संगीन आरोप सामने आ चुके हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खरे और उसके सहयोगी ग्रामीणों को लालच देकर उनके वाहनों का इस्तेमाल फर्जी एक्सीडेंट, बीमा क्लेम और अवैध लाभ के लिए करते हैं। अस्पताल और प्रभावशाली संपर्कों की आड़ में यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय होने का दावा किया जा रहा है।

निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग-
पीड़ित ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, चिटलरी में संलिप्त सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो तथा उसका वाहन तत्काल सुपुर्द किया जाए। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि जिले में सक्रिय उन कथित गिरोहों पर भी सवाल खड़े करता है, जो स्वास्थ्य संस्थानों और रसूख का सहारा लेकर आम नागरिकों को शिकार बना रहे हैं।

