Crime ReportsCrime ReportsIndiaJabalpurLatest NewsMP

इलाज से पहले दलालों का सामना? महाकौशल के सबसे बड़े मेडिकल अस्पताल में दलालों की घुसपैठ? मरीजों के आरोपों के बाद व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इलाज से पहले दलालों का सामना? महाकौशल के सबसे बड़े मेडिकल अस्पताल में दलालों की घुसपैठ? मरीजों के आरोपों के बाद व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

SET NEWS जबलपुर सुनील सेन!  महाकौशल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर हर दिन हजारों मरीज पहुंचते हैं। लेकिन कुछ मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में कथित दलाल सक्रिय हैं, जो इलाज, जांच या अन्य सेवाओं के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि इनमें सच्चाई है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।

दूर-दराज़ के गांवों और जिलों से आने वाले मरीजों का कहना है कि अस्पताल की प्रक्रिया की जानकारी न होने का फायदा कुछ लोग उठाते हैं। उनका आरोप है कि जैसे ही मरीज अस्पताल पहुंचता है, कुछ लोग खुद को मददगार बताकर संपर्क करते हैं और विभिन्न सेवाओं के लिए बाहर भेजने का प्रयास करते हैं।

यहीं से कई सवाल खड़े होते हैं। यदि अस्पताल परिसर में वास्तव में ऐसे लोग सक्रिय हैं, तो उनकी पहुंच कैसे बनी? क्या अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है? क्या सुरक्षा व्यवस्था इतनी प्रभावी है कि अनधिकृत लोगों को रोका जा सके? और यदि शिकायतें मिल रही हैं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई है?

यह अस्पताल पूरे महाकौशल क्षेत्र के लाखों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। ऐसे संस्थान में पारदर्शिता, व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मरीजों को इलाज से पहले भ्रम, असुविधा या कथित बिचौलियों का सामना करना पड़े, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

अब जरूरत है कि अस्पताल प्रशासन इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराए। यदि कोई कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए मरीजों का आर्थिक शोषण करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, अस्पताल परिसर में निगरानी बढ़ाई जाए, अधिकृत सहायता केंद्र स्पष्ट रूप से चिन्हित किए जाएं और मरीजों को सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि ऐसे आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो उनकी सच्चाई की जांच कब होगी? यदि कोई दोषी है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? और यदि आरोप गलत हैं, तो प्रशासन पारदर्शी जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कब करेगा? इन सवालों के जवाब की उम्मीद अब अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से है।

Related Articles

Back to top button