मनेरी पेट्रोल पंप डकैती का खुलासा या पुरानी नाकामी पर पर्दा? चार आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी समेत चार फरार; थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मनेरी पेट्रोल पंप डकैती का खुलासा या पुरानी नाकामी पर पर्दा? चार आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी समेत चार फरार; थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मंडला/जबलपुर। जबलपुर-मंडला सीमा पर चौकी मनेरी के अतुलित फिलिंग सेंटर पेट्रोल पंप पर हुई डकैती के मामले में मंडला पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की कार्रवाई में 50 हजार 500 रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक MP-20-ZX-1968 बरामद किया गया है। कार्रवाई निश्चित तौर पर पुलिस के लिए बड़ी सफलता है, लेकिन इस पूरे मामले ने स्थानीय थाना पुलिस की कार्यप्रणाली और पेट्रोल पंप पर पहले हुई वारदातों के लंबित खुलासे को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एक संवेदनशील पेट्रोल पंप पर पहले भी चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी थीं, तो उन वारदातों का अब तक खुलासा क्यों नहीं किया गया? क्या पुराने मामलों में पुलिस की जांच सही दिशा में नहीं बढ़ी? क्या रात्रि गश्त और निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी? और क्या पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं होने के कारण बदमाशों के हौसले बढ़े?
सात नकाबपोश बदमाशों ने हथियारों के बल पर लूटे 93,875 रुपये,
घटना 9 अगस्त की मध्यरात्रि की है। सात नकाबपोश बदमाश अतुलित फिलिंग सेंटर पेट्रोल पंप पर पहुंचे। बदमाशों ने हथियारों के बल पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों को धमकाया और करीब 93,875 रुपये की नकदी लूटकर फरार हो गए। वारदात इतनी गंभीर थी कि पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
घटना की पूरी तस्वीर पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई। इसके बाद बीजाडांडी थाना की चौकी मनेरी में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एसपी राजेश रघुवंशी ने संभाली कमान, 8 टीमों को लगाया,
वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले के आरोपियों तक पहुंचने के लिए 8 विशेष पुलिस टीमों का गठन किया। इन टीमों में 40 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल किए गए।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों और कर्मचारियों के बयानों का विश्लेषण किया। जांच का दायरा मनेरी से निकलकर जबलपुर के बरेला, भूकम्प कॉलोनी और मेडिकल कॉलेज क्षेत्र तक पहुंचा। इसके बाद 15 और 16 अगस्त को पुलिस ने दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में अमित झारिया, पवन झारिया, सौरभ शर्मा और शिवम श्रीपाल शामिल हैं।
50,500 रुपये और स्कॉर्पियो बरामद,
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर लूट की रकम में से 50,500 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो वाहन MP-20-ZX-1968 भी जब्त किया गया है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के लिए आरोपियों ने अपने एक परिचित से स्कॉर्पियो वाहन किराए पर लिया था। गिरफ्तार आरोपियों में दो के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सामने आई है। तीन आरोपी ड्राइवर हैं, जबकि एक आरोपी अंडे का ठेला लगाता है।
मुख्य आरोपी आयुष विश्वकर्मा समेत चार अब भी फरार,
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद डकैती का पूरा नेटवर्क अभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। मामले का मुख्य आरोपी आयुष विश्वकर्मा, जो इंजीनियरिंग का छात्र बताया जा रहा है, अभी फरार है। उसके साथ तीन अन्य आरोपियों के भी फरार होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
आरोपियों की गिरफ्तारी पर कुल 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। ऐसे में अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार आरोपियों को गिरफ्तार करना है।
पुरानी चोरी का खुलासा क्यों नहीं? थाना पुलिस से सवाल,
इस मामले में सबसे अहम सवाल स्थानीय थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर है। यदि पेट्रोल पंप पर पहले भी चोरी की घटनाएं हुई थीं, तो उन मामलों में पुलिस अब तक आरोपियों तक क्यों नहीं पहुंच सकी?
पेट्रोल पंप जैसी जगह जहां लगातार नकदी का लेन-देन होता है, वहां सुरक्षा और पुलिस निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद अगर एक ही स्थान पर बार-बार अपराध होते हैं, तो स्थानीय पुलिस की पेट्रोलिंग, मुखबिर तंत्र और अपराधियों पर निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह भी सवाल है कि क्या पुराने मामलों के आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच का पर्याप्त इस्तेमाल किया गया? यदि पहले की चोरी का खुलासा हो जाता, तो क्या 9 अगस्त की बड़ी डकैती को टाला जा सकता था? इन सवालों का जवाब संबंधित थाना प्रभारी और स्थानीय पुलिस को देना होगा।
चार गिरफ्तारी के बाद क्या पुलिस ने थपथपाई अपनी पीठ?
चार आरोपियों की गिरफ्तारी, नकदी और स्कॉर्पियो की बरामदगी पुलिस की जांच में उपलब्धि है। खासकर एसपी राजेश रघुवंशी द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए आठ विशेष टीमों का गठन और जांच को जबलपुर तक ले जाना पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है।
लेकिन दूसरी तरफ यह सवाल भी अपनी जगह कायम है कि क्या चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे मामले को सफलतापूर्वक हल मान लिया जाए? जब मुख्य आरोपी आयुष विश्वकर्मा समेत चार आरोपी अभी फरार हैं और लूटी गई पूरी रकम बरामद नहीं हुई है, तो कार्रवाई को अंतिम सफलता कहना जल्दबाजी होगी।
अब असली परीक्षा थाना पुलिस की है। उसे फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ पेट्रोल पंप पर पहले हुई चोरी की घटनाओं का भी खुलासा करना होगा।
डकैती का खुलासा हुआ, चार आरोपी पकड़े गए, लेकिन कहानी अभी अधूरी है। सवाल यह है कि पेट्रोल पंप पर पहले हुई चोरी का हिसाब कौन देगा और फरार आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा कब कसेगा?



