सिंगरौली SB शाखा में प्रधान आरक्षक की मौत ने उठाए सिस्टम पर सवाल! ट्रांसफर की परेशानी का सुसाइड नोट में जिक्र, आखिर जिम्मेदार कौन?
ड्यूटी के दबाव और स्थानांतरण की परेशानी के बीच उठाया आत्मघाती कदम, क्या पुलिस विभाग के अफसरों ने समय रहते नहीं सुनी कर्मचारी की आवाज?

सुनील सेन SET NEWS। सिंगरौली। सिंगरौली जिले के बैढ़न स्थित स्पेशल ब्रांच (SB) कार्यालय में पदस्थ प्रधान आरक्षक राकेश गंगले की मौत ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात कार्यालय कक्ष में प्रधान आरक्षक का शव मिलने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि मौके से मिले सुसाइड नोट में स्थानांतरण को लेकर मानसिक परेशानी का उल्लेख बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पुलिस विभाग में ड्यूटी करने वाले एक कर्मचारी की परेशानी किस स्तर तक पहुंच गई कि उसे इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा?
क्या समय रहते सुनी गई थी प्रधान आरक्षक की आवाज?
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट में प्रधान आरक्षक राकेश गंगले द्वारा स्थानांतरण को लेकर कई बार पुलिस मुख्यालय भोपाल के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताने का उल्लेख किया गया है। यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है, तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि जब एक पुलिस कर्मचारी अपनी समस्या लेकर बार-बार अधिकारियों के सामने पहुंच रहा था, तब उसकी परेशानी का समाधान क्यों नहीं हो सका? क्या विभागीय स्तर पर उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया या फिर एक कर्मचारी की समस्या कागजी कार्रवाई और आश्वासन के बीच दबकर रह गई?
ड्यूटी करने वाले जवान ही अगर परेशान हैं तो व्यवस्था पर सवाल क्यों न उठें?
पुलिस विभाग में जवान और अधिकारी दिन-रात कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। कई बार उन्हें लंबी ड्यूटी, मानसिक दबाव और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं को समय रहते सुनना वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। राकेश गंगले की मौत के बाद अब यही सवाल सामने है कि क्या विभाग में अधीनस्थ कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और उनके मानसिक तनाव को समझने की कोई प्रभावी व्यवस्था जमीन पर मौजूद है?
पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल,
इस पूरे मामले में सीएसपी ललित बैरागी ने बताया है कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार मौके से मिले सुसाइड नोट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। लेकिन जांच के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि प्रधान आरक्षक द्वारा जिन परेशानियों का उल्लेख किया गया, वे कितनी पुरानी थीं और उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई थी।
सिर्फ मर्ग कायम करने से खत्म नहीं होंगे सवाल,
प्रधान आरक्षक की मौत के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू करना कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन सवाल इससे कहीं बड़ा है। अगर सुसाइड नोट में स्थानांतरण को लेकर परेशानी का स्पष्ट उल्लेख है, तो जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना चाहिए कि राकेश गंगले ने किन अधिकारियों से संपर्क किया, कब आवेदन दिए, उनकी समस्या क्या थी और उन आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
परिवार के आने के बाद होगी आगे की कार्रवाई,
पुलिस के मुताबिक तहसीलदार की मौजूदगी में आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को नीचे उतारा गया था। मौके से मिले सुसाइड नोट और अन्य तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। मृतक के परिजनों के सिंगरौली पहुंचने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि आत्महत्या के पीछे केवल स्थानांतरण संबंधी परेशानी थी या इसके अलावा कोई अन्य कारण भी मौजूद था।
सवाल सिर्फ एक कर्मचारी की मौत का नहीं, पूरे सिस्टम का है,
राकेश गंगले की मौत को केवल एक पुलिसकर्मी की व्यक्तिगत त्रासदी मानकर मामला खत्म कर देना कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देगा। असली सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग में नीचे से ऊपर तक कर्मचारियों की समस्याएं सुनने की व्यवस्था प्रभावी है? क्या ड्यूटी और स्थानांतरण से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते संवेदनशीलता दिखाई जाती है? और अगर कोई कर्मचारी बार-बार अपनी परेशानी अधिकारियों तक पहुंचा रहा हो तो उसकी समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
यह जरूरी है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी अधिकारी या विभागीय व्यवस्था पर आरोप केवल जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही तय किए जाएं। लेकिन अगर जांच में यह सामने आता है कि किसी कर्मचारी ने लगातार अपनी परेशानी बताई और उसके बावजूद उसे मदद नहीं मिली, तो यह पुलिस विभाग के लिए आत्ममंथन का गंभीर विषय होगा।
- राकेश गंगले की मौत ने छोड़ा बड़ा सवाल—जवान जनता की सुरक्षा के लिए खड़ा है, लेकिन उसकी परेशानी सुनने के लिए विभाग में कौन खड़ा है?
SET NEWS सिंगरौली — अब नजर पुलिस जांच पर है कि सुसाइड नोट में सामने आई परेशानियों की तह तक जाकर जिम्मेदारी तय होती है या मामला सिर्फ मर्ग कायम होने तक सीमित रह जाता है।



