एडवांस हॉस्पिटल में गर्भवती महिला की मौत पर उठे सवाल, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
ज्योति गौड़ की मौत के बाद परिवार ने मांगी निष्पक्ष जांच, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

जबलपुर। शहर के एडवांस हॉस्पिटल में उपचार के दौरान प्रसूता की मौत का मामला सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और उपचार से जुड़े लोगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मृतका के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को प्रसव पीड़ा होने पर शिवप्रसाद गौड़ अपनी पत्नी ज्योति गौड़ को लेकर मेडिकल कॉलेज जबलपुर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि वहां से उन्हें उचित उपचार और मार्गदर्शन नहीं मिल पाया, जिसके बाद वे ज्योति को एडवांस हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में ज्योति को भर्ती किया गया और रात करीब 11 बजे प्रसव हुआ। प्रसव के बाद चिकित्सकों द्वारा रक्त की आवश्यकता बताए जाने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे करीब 5,500 रुपये नकद लिए।
इसके बाद परिजनों के अनुसार ज्योति की हालत लगातार बिगड़ती गई। साथ ही नवजात की स्थिति भी गंभीर होने की जानकारी दी गई। परिवार का आरोप है कि बच्चे के उपचार और उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया में भी समय लगा।
शिवप्रसाद गौड़ का आरोप है कि उनकी पत्नी को उपचार के लिए भर्ती करने के बाद उन्हें स्थिति की पूरी जानकारी लगातार नहीं दी गई। उनका कहना है कि उनकी पत्नी की हालत गंभीर होने के बावजूद परिवार को समय रहते उचित जानकारी और आवश्यक चिकित्सा निर्णयों से अवगत कराया जाना चाहिए था।
परिजनों के मुताबिक बाद में ज्योति को मेडिकल कॉलेज ले जाने की बात सामने आई। परिवार का आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे ज्योति को मेडिकल कॉलेज के गेट पर मृत अवस्था में छोड़ दिया गया। इसके बाद परिवार को उसकी मौत की जानकारी मिली।
घटना के बाद मेडिकल चौकी पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कराया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
परिजनों ने उठाए उपचार व्यवस्था पर सवाल,
शिवप्रसाद गौड़, उनके परिजनों और संबंधित लोगों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि जांच में एडवांस हॉस्पिटल में भर्ती से लेकर प्रसव, उपचार, रक्त की व्यवस्था, नवजात की स्थिति, मेडिकल कॉलेज रेफर करने और मृत्यु तक की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल के डॉक्टरों, प्रबंधन और ड्यूटी स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जाए। साथ ही उपचार से संबंधित दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, भुगतान की रसीद और ड्यूटी स्टाफ की जानकारी सुरक्षित कराई जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उचित उपचार और सही चिकित्सकीय निर्णय लिया जाता तो शायद ज्योति गौड़ की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल इस मामले में एडवांस हॉस्पिटल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए अस्पताल पर लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
परिजनों की मांग साफ है—पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



