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चोरियों से दहला जबलपुर का पाटन: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल, एडिशनल एसपी को सौंपा ज्ञापन”

पाटन में बढ़ती चोरियों के विरोध में उबाल, ग्रामीणों ने एडिशनल एसपी को सौंपा ज्ञापन, थाना घेराव और पाटन बंद की चेतावनी

ये पाटन है! यहाँ अब कानून का राज नहीं, बल्कि चोरों का आतंक चलता है। ये पाटन है! जहाँ खाकी वर्दी अब सुरक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि पुलिस की लाचारी का विज्ञापन बन चुकी है। जबलपुर जिले के पाटन थाना क्षेत्र में जो हो रहा है, वो शर्मनाक भी है और चिंताजनक भी। एक तरफ चोरों की पूरी फौज है जो बेखौफ होकर जनता की गाढ़ी कमाई लूट रही है, और दूसरी तरफ पाटन थाना प्रभारी की वो पुलिस है जो शायद गहरी नींद के आगोश में है। आज सवाल सीधा है— पाटन पुलिस किसके लिए काम कर रही है? जनता के लिए या अपराधियों की सहूलियत के लिए?”

 

जबलपुर जिले के पाटन थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराज लोगों ने पाटन थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है।

इसी कड़ी में आज बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एडिशनल एसपी से मुलाकात कर पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पाटन क्षेत्र में लगातार हो रही चोरियों के बावजूद अब तक ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

पीड़ित विवेक बबेले का कहना है कि बीते कुछ महीनों में क्षेत्र में कई बड़ी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस केवल आश्वासन तक सीमित नजर आ रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि थाना स्तर पर गश्त और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण चोर लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

विवेक बबेले के घर हुई बड़ी चोरी का मामला भी ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाया, जिसमें करीब 14 लाख 30 हजार रुपये के गहने और नकदी चोरी हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी गंभीर घटनाओं के बावजूद पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही है।

 

पाटन थाना प्रभारी की कार्यशैली आज खुद एक बड़ा सवालिया निशान बन गई है। क्षेत्र की जनता का आरोप है कि थाने के भीतर शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन TI साहब के पास अपराधियों को पकड़ने की न तो कोई रणनीति है और न ही इच्छाशक्ति। जब एक के बाद एक कई चोरियाँ होती हैं और पुलिस एक भी सुराग नहीं जुटा पाती, तो इसे केवल ‘नाकामी’ नहीं, बल्कि ‘मिलीभगत’ या ‘घोर लापरवाही’ कहा जाना चाहिए।

रात के अंधेरे में पाटन की सड़कों पर जब पुलिस की गश्त होनी चाहिए, तब गलियाँ वीरान रहती हैं। पुलिस की निष्क्रियता ने चोरों को यह संदेश दे दिया है कि पाटन में चोरी करना सबसे आसान काम है, क्योंकि यहाँ पुलिस केवल घटना के बाद ‘खानापूर्ति’ करने आती है। पुलिस की इस बेअसर कार्यप्रणाली ने आम नागरिक को अपने ही घर में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।”

एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चोरी की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया गया और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में पाटन थाना घेराव किया जाएगा और यदि फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पूरे पाटन क्षेत्र को बंद (बंद आंदोलन) किया जाएगा। ग्रामीणों ने इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर डालते हुए कहा कि यह कदम मजबूरी में उठाया जाएगा।
इस दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और चोरियों में शामिल गिरोहों का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए।

वहीं प्रशासन की ओर से एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और उच्च स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीमों को सक्रिय कर दिया गया है और जल्द ही परिणाम सामने आएंगे।


कानून व्यवस्था का मखौल उड़ाती पाटन पुलिस को अब जागना ही होगा। जनता का धैर्य टूट रहा है। अगर जल्द ही अपराधियों के गिरेबान तक खाकी के हाथ नहीं पहुँचे, तो पाटन का ये आक्रोश थाने के घेराव और ‘शहर बंद’ की ऐसी आग भड़काएगा, जिसे बुझाना प्रशासन के बस में नहीं होगा। अब वक्त आ गया है कि पाटन थाना पुलिस अपनी वर्दी का मान रखे, वरना जनता का ये सैलाब व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है।”

देखना होगा कि SP साहब के संज्ञान के बाद पाटन TI की कार्यशैली में कोई सुधार आता है या पुलिस की ये ‘काली नींद’ जारी रहती है।”

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