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मैहर # हर में अवैध खनन का बड़ा खुलासा: आदिवासी की जमीन पर हुकुमचंद कंपनी का कब्जा, करोड़ों का लाइमस्टोन लूटा, प्रशासन चुप्पी साधे…

आदिवासी युवराज सिंह गौड़ की जमीन पर अवैध कब्जा

सेटन्यूज़, (रामकुमार रजक) मैहर। जिले के भटूरा क्षेत्र में संचालित हुकुमचंद स्टोन लाइम कंपनी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस बार मामला एक आदिवासी की निजी जमीन पर अवैध कब्ज़ा और बड़े पैमाने पर खनिज उत्खनन का है। आरोप है कि कंपनी के संचालकों और उनके साझेदारों ने बिना वैध अनुमति के करीब 10 एकड़ से अधिक भूमि से पत्थर निकालकर बेच दिया, जबकि संबंधित विभाग कार्रवाई करने में विफल रहे।

पीड़ित आदिवासी युवराज सिंह गौड़ ने जिला कलेक्टर को दी गई शिकायत में बताया है कि हुकुमचंद कंपनी के संचालक और उनके छह साझेदार ऋषभ जैन, सुधीर जैन, मनीष जैन, सुशील जैन, सिद्धांत जैन और सौरव जैन ने मिलकर उसकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर खनन कार्य शुरू कर दिया। आरोप है कि बिना किसी वैध “भू-प्रवेश” अनुमति के खनन किया गया करीब 10 एकड़ से अधिक भूमि को खोद डाला गया निकाले गए पत्थरों को बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाया गया

एसडीएम का आदेश, लेकिन ज़मीन अब भी नहीं मिली
इस मामले में पहले भी शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मैहर के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद 11 मार्च 2025 को आदेश जारी हुआ, जिसमें अवैध खनन की पुष्टि की गई कंपनी को 7 दिनों के भीतर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे, पीड़ित को कब्ज़ा वापस दिलाने का आदेश दिया गया लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश के लगभग 7 महीने बाद भी जमीन वापस नहीं कराई गई।

प्रशासन और खनिज विभाग पर सवाल
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार:हुकुमचंद कंपनी को संबंधित भूमि पर खनन की कोई वैध अनुमति नहीं है इसके बावजूद खनन कार्य जारी है। इससे यह सवाल उठता है:क्या खनिज विभाग जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रहा? क्या प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव या मिलीभगत है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई गरीब व्यक्ति छोटी सी सरकारी जमीन पर निर्माण करता है, तो तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े खनन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है।

नाबालिग की मौत का मामला भी ठंडे बस्ते में
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले इसी खदान में एक नाबालिग मजदूर की मौत का मामला सामने आया था। आरोप हैं कि नाबालिग से अवैध श्रम कराया जा रहा था। हादसे के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गंभीर धाराएँ (जैसे गैर-इरादतन हत्या) लागू नहीं की गईं इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।

भटूरा क्षेत्र में अवैध खनन का जाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार हुकुमचंद कंपनी के संचालकों द्वारा भटूरा और आसपास के क्षेत्रों में कई खदानें बिना वैध लीज के संचालित हो रही हैं वन क्षेत्र के पास भी अवैध खनन किया जा रहा है पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है

वन और खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल
चार प्रमुख विभाग खनिज विभाग वन विभाग, श्रम विभाग, पर्यावरण विभाग
इन सभी पर आरोप है कि वे कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं।
विशेष रूप से: वन विभाग की निष्क्रियता जंगलों के नुकसान को बढ़ा रही है। खनिज विभाग पर “मैनेजमेंट” में होने के आरोप लग रहे है।

कमिश्नर के सामने रखा जाएगा मामला
पीड़ित ने अब मामले को रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद के समक्ष ले जाने की तैयारी में है। उम्मीद की जा रही है कि उच्च स्तर पर जांच के बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हो सकता है।

मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं
एसडीएम के आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? बिना अनुमति खनन कैसे जारी है? नाबालिग की मौत के मामले में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या विभागों की मिलीभगत से अवैध खनन चल रहा है?

विकास या विनाश?
भटूरा क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है, वह विकास नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और कानून का खुला दोहन प्रतीत होता है। एक ओर आदिवासी अपनी ही जमीन के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर खनन माफिया बेखौफ होकर संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी। गरीब और कमजोर वर्गों का शोषण बढ़ेगा प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमज़ोर होगा।

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