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जबलपुर में बेलगाम चाकूबाजी: आखिर जिम्मेदार कौन? हर गली-मोहल्ले में खौफ, कानून का डर खत्म या अपराधियों के हौसले बुलंद?

बेलगाम चाकूबाजी: आखिर जिम्मेदार कौन? हर गली-मोहल्ले में खौफ, कानून का डर खत्म या अपराधियों के हौसले बुलंद?

 

संस्कारधानी जबलपुर इन दिनों लगातार बढ़ रही चाकूबाजी की घटनाओं से दहशत के साये में जी रही है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि मामूली विवाद, पुरानी रंजिश, प्रेम प्रसंग या छोटी सी कहासुनी भी सीधे खूनी संघर्ष में बदल रही है। शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों से लगातार सामने आ रही चाकूबाजी की घटनाओं ने आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां विजय कटपीस के पीछे रहने वाले 25 वर्षीय ऋषभ विश्वकर्मा पर पुरानी रंजिश के चलते जानलेवा हमला कर दिया गया। ऋषभ विश्वकर्मा ने पुलिस को बताया कि जब वह मक्रवाहिनी मंदिर के पास गुटखा लेकर वापस लौट रहा था, तभी राहुल विश्वकर्मा और राहुल सोनी ने उसे घेर लिया। आरोप है कि राहुल सोनी ने उसके हाथ पकड़ लिए और राहुल विश्वकर्मा ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में ऋषभ के हाथ, जांघ और कंधे में गंभीर चोटें आईं। शोर सुनकर उसका भाई रोहित और अभि बर्मन मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी फरार हो गए।

यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते कुछ महीनों में गोराबाजार, रांझी, हनुमानताल, अधारताल, मदनमहल, ग्वारीघाट, कोतवाली और संजीवनी नगर सहित कई थाना क्षेत्रों में चाकूबाजी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कहीं पुरानी रंजिश में हमला हुआ, कहीं शराब के नशे में विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया तो कहीं दोस्तों के बीच शुरू हुआ झगड़ा अस्पताल तक पहुंच गया।

शहरवासियों का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि घर से निकलने वाला व्यक्ति सुरक्षित वापस लौटेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रह गई है। सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और मोहल्लों में चाकू लेकर घूमने वाले असामाजिक तत्वों के कारण लोगों में भय का माहौल है। सबसे ज्यादा चिंता युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को लेकर जताई जा रही है।

सवाल यह है कि आखिर इन बढ़ती घटनाओं का जिम्मेदार कौन है? क्या अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो गया है? क्या लगातार हो रही वारदातों के बावजूद सख्त और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही? या फिर समाज में बढ़ रही असहिष्णुता और नशे की प्रवृत्ति अपराध को बढ़ावा दे रही है?

पुलिस हर घटना के बाद मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर देती है, लेकिन लगातार हो रही चाकूबाजी यह संकेत देती है कि अपराधियों में कानून का खौफ पहले जैसा नहीं रहा। शहर के नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि पुलिस विशेष अभियान चलाकर चाकू लेकर घूमने वाले बदमाशों, आदतन अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई करे।

आज जबलपुर का सबसे बड़ा सवाल यही है— आखिर चाकूबाजी की इन घटनाओं पर लगाम कब लगेगी? क्योंकि हर नई वारदात के साथ शहर में दहशत बढ़ रही है और लोगों का सुरक्षा पर भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

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