जिंदा कर दिया मृतक को! बरगी लोक सेवा केंद्र की बड़ी लापरवाही, मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह थमा दिया जन्म प्रमाण पत्र
जिंदा कर दिया मृतक को! बरगी लोक सेवा केंद्र की बड़ी लापरवाही, मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह थमा दिया जन्म प्रमाण पत्र

संस्कारधानी जबलपुर में सरकारी व्यवस्था की एक ऐसी चूक सामने आई है, जिसने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एक शोकाकुल परिवार की परेशानी भी कई गुना बढ़ा दी है। मामला बरगी लोक सेवा केंद्र का है, जहां एक मृत महिला के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र देने के बजाय जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इस गंभीर लापरवाही के बाद पीड़ित परिवार अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम वासन पानी निवासी गेन सिंह ने अपनी माता स्वर्गीय छन्नू बाई के निधन के बाद सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ बरगी लोक सेवा केंद्र में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। परिवार को उम्मीद थी कि समय पर मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद वे बैंक, राजस्व और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कर सकेंगे।
लेकिन जब लोक सेवा केंद्र से दस्तावेज मिला, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह उन्हें स्वर्गीय छन्नू बाई का जन्म प्रमाण पत्र थमा दिया गया। इस एक गलती ने पूरे परिवार को हैरानी में डाल दिया।
पीड़ित गेन सिंह का कहना है कि उन्होंने नियमों का पालन करते हुए आवेदन किया था, लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से अब उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि एक साधारण जांच से भी यह गलती रोकी जा सकती थी, लेकिन जिम्मेदारों ने दस्तावेज जारी करने से पहले सत्यापन तक करना जरूरी नहीं समझा।
यह मामला सामने आने के बाद बरगी लोक सेवा केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आखिर बिना दस्तावेजों का सही मिलान किए इतना महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया गया? क्या आवेदन की जांच नहीं की गई? क्या दस्तावेज जारी करने से पहले कोई जिम्मेदार अधिकारी सत्यापन नहीं करता?
मामले में नायब तहसीलदार जय सिंह धुर्वे ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को सही दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाएगी।
यह घटना सरकारी कार्यालयों में दस्तावेजों के सत्यापन और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। जिस परिवार ने अपनी मां को खोया, उसे संवेदना और सुविधा मिलने के बजाय अब अपनी बात साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।



