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जबलपुर: गौशाला या मौत का घर? डूंड़ी में दम तोड़ रही गौमाता, एक हफ्ते में 6 गायों की मौत से मचा हड़कंप

गौशाला बनी मौत का अड्डा? डूंड़ी में एक हफ्ते में 6 गौवंश की मौत, जिम्मेदारों पर सवाल गौशाला में तड़प-तड़प कर मर रहे गौवंश, एक सप्ताह में 6 मौतों से हड़कंप

जबलपुर के डूंड़ी स्थित रानी अवंती बाई गौशाला की तस्वीरें और हालात शासन के गौ-संरक्षण संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिस गौशाला का उद्देश्य बेसहारा और बीमार गौवंश को सुरक्षित आश्रय देना है, वहीं अब गायों की लगातार हो रही मौतों ने पूरे मामले को चिंताजनक बना दिया है।

जानकारी के अनुसार बीते एक सप्ताह के भीतर गौशाला में 6 गौवंश की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों और गौ-सेवा से जुड़े लोगों का आरोप है कि गौशाला में व्यवस्थाओं का भारी अभाव है। परिसर में साफ-सफाई की स्थिति खराब है, कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और बीमार गौवंश को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में भी कई गायें गंभीर हालत में गौशाला परिसर में पड़ी हुई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में चारे, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गौवंश लगातार बीमार पड़ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई पशु खड़े होने की स्थिति में भी नहीं हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौवंश के संरक्षण के नाम पर योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर व्यवस्थाएं नदारद नजर आती हैं। लगातार हो रही मौतों के बाद भी जिम्मेदारों की चुप्पी लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या गौशाला प्रबंधन ने समय रहते बीमार पशुओं के इलाज की व्यवस्था की? और यदि नहीं, तो इसके लिए जवाबदेही तय कब होगी?

गौरक्षकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो और भी गौवंश अपनी जान गंवा सकते हैं।

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इन बेजुबानों की पीड़ा सुनने वाला कोई होगा, या फिर गौशाला में मौतों का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?

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