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नेताजी सुभाषचंद्र मेडिकल अस्पताल की पार्किंग में ‘वसूली’ का खेल! ₹10 की जगह ₹500 तक की मांग, मरीजों की जेब पर डाका?

पार्किंग शुल्क के नाम पर कथित मनमानी,

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए पार्किंग भी परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। आरोप है कि पार्किंग स्टैंड पर निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा रकम मांगी जा रही है। ₹10 की जगह ₹100 से लेकर ₹500 तक वसूली के आरोपों ने पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

₹10 की पर्ची, फिर ₹500 की मांग क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्धारित पार्किंग शुल्क ₹10 बताया जा रहा है, तो वाहन चालकों से कथित तौर पर ₹100, ₹200 और यहां तक कि ₹500 तक क्यों मांगे जा रहे हैं? अगर यह वसूली सही है तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? मरीजों के परिजन पहले ही इलाज के खर्च से परेशान होते हैं और ऐसे में पार्किंग के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगने के आरोप व्यवस्था पर बड़ा सवाल हैं।

विरोध किया तो बदसलूकी के भी आरोप,
शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिक रकम देने से इनकार करने पर पार्किंग कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर अभद्रता, गाली-गलौज, धमकी और मारपीट तक की गई। अस्पताल परिसर में आने वाले लोगों के साथ यदि ऐसा व्यवहार होता है तो यह बेहद गंभीर मामला है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

पार्किंग संचालक और कर्मचारियों से जवाब तलब,
मामला सामने आने के बाद अब पार्किंग स्टैंड संचालक और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। क्या कर्मचारी अपने मन से रकम मांग रहे थे या फिर उन्हें ऐसा करने के निर्देश दिए गए थे? अस्पताल प्रबंधन ने अब इसी सवाल का जवाब मांगते हुए पार्किंग संचालक को नोटिस जारी किया है।

डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने लिया संज्ञान,
मामले को नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने गंभीरता से लिया है। उनके आदेश पर पार्किंग स्टैंड संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। संचालक से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि पार्किंग शुल्क को लेकर कथित अतिरिक्त वसूली किस आधार पर की जा रही थी।

अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा का बड़ा बयान,
मामले में अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि पूरा मामला अस्पताल प्रबंधन के संज्ञान में है। पार्किंग स्टैंड संचालक को नोटिस दिया गया है और जवाब मांगा गया है। पार्किंग पर्ची में दर्ज समय और पैसे को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अब संचालक के जवाब पर टिकी कार्रवाई,
अधीक्षक के मुताबिक संचालक से जवाब मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली या कर्मचारियों की मनमानी सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों के अस्पताल आने का मतलब ‘अतिरिक्त वसूली’ नहीं,
मेडिकल अस्पताल में गंभीर मरीजों को लेकर परिजन दूर-दूर से पहुंचते हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था उनके लिए सुविधा होनी चाहिए, परेशानी नहीं। ₹10 के शुल्क के बदले ₹500 तक मांगने के आरोप, अगर जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल पार्किंग का मामला नहीं बल्कि अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों के साथ व्यवस्था के नाम पर कथित मनमानी का गंभीर सवाल होगा।

अब सवाल पार्किंग संचालक से—जवाब कब?
फिलहाल नोटिस जारी हो चुका है और संचालक से जवाब मांगा गया है। अब देखना होगा कि वह कथित अतिरिक्त वसूली के आरोपों पर क्या सफाई देता है और अस्पताल प्रबंधन जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है। सवाल साफ है—अगर शुल्क ₹10 है, तो ₹500 तक की कथित मांग आखिर किसके इशारे पर और क्यों?

मेडिकल प्रबंधन की कार्रवाई से उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि पार्किंग संचालक या कर्मचारियों की मनमानी साबित होती है, तो मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

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