मेडिकल अस्पताल में पार्किंग के नाम पर ‘लूट’! ₹10 की जगह ₹500 तक वसूली, विरोध पर मारपीट के आरोप

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में महाकौशल के सबसे बड़े अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर के वाहन स्टैंड में निर्धारित पार्किंग शुल्क से कई गुना ज्यादा रकम मरीजों और उनके परिजनों से वसूली जा रही है। जहां पार्किंग शुल्क ₹10 बताया जा रहा है, वहीं आरोप है कि वाहन चालकों से ₹100 से लेकर ₹500 तक की रकम मांगी जा रही है।
₹10 की जगह ₹100 से ₹500 तक वसूली का आरोप,
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि पार्किंग स्टैंड पर तैनात कुछ कर्मचारी मनमाने तरीके से पैसे मांगते हैं। कथित तौर पर निर्धारित शुल्क से ज्यादा रकम देने से इनकार करने पर विवाद की स्थिति बन जाती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की शिकायतें सामने आना बेहद गंभीर माना जा रहा है।
विरोध करने वालों से बदसलूकी और मारपीट के आरोप,
आरोप यह भी हैं कि अधिक पैसे देने से इनकार करने वाले लोगों के साथ पार्किंग स्टैंड से जुड़े कर्मचारियों द्वारा गाली-गलौज, धमकी, धक्का-मुक्की और मारपीट तक की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत जांच होना बाकी है, लेकिन शिकायतों ने मेडिकल अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
मरीजों के परिजन पहले से परेशान, ऊपर से पार्किंग का बोझ,
मेडिकल अस्पताल में जबलपुर ही नहीं बल्कि महाकौशल के अलग-अलग जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मरीज के परिजन पहले ही इलाज और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे होते हैं। यदि इसी दौरान वाहन पार्किंग के नाम पर कथित तौर पर मनमानी रकम वसूली जाती है, तो यह व्यवस्था अस्पताल आने वाले लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है।
अस्पताल प्रबंधन की निगरानी पर भी सवाल,
सबसे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि पार्किंग स्टैंड में निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूली की जा रही है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल रही? क्या पार्किंग स्टैंड की नियमित जांच की जाती है? क्या वहां रेट लिस्ट और रसीद व्यवस्था की पर्याप्त निगरानी हो रही है?
ठेके और वसूली की होनी चाहिए निष्पक्ष जांच,
मामले में अब मांग उठ रही है कि अस्पताल प्रबंधन पार्किंग स्टैंड के ठेके, निर्धारित शुल्क, रसीद व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराए। साथ ही यदि किसी व्यक्ति के साथ मारपीट या धमकी की शिकायत सामने आती है, तो उसकी भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
अधीक्षक और डीन से कार्रवाई की उम्मीद,
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि मेडिकल अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित व्यवस्था मिलनी चाहिए। ऐसे में मेडिकल अस्पताल के अधीक्षक और डीन को पूरे मामले का संज्ञान लेकर पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की जांच करानी चाहिए, ताकि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
फिलहाल सवाल यही है कि मेडिकल अस्पताल परिसर में पार्किंग के नाम पर कथित मनमानी वसूली और दबंगई कब रुकेगी? क्या अस्पताल प्रबंधन इस मामले की जांच कराकर मरीजों और उनके परिजनों को राहत दिलाएगा?



