महाकौशल के सबसे बड़े मेडिकल अस्पताल में गुंडागर्दी! ड्यूटी पर जूनियर डॉक्टर से मारपीट के बाद हड़ताल, मरीज बेहाल
जबलपुर | डॉक्टर पर हमला | सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल | मेडिकल कॉलेज में ठप हुई स्वास्थ्य सेवाएं

सुनील सेन SET NEWS, जबलपुर। जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक जूनियर डॉक्टर के साथ कथित मारपीट की घटना ने पूरे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देर रात हुई इस घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर डीन कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि अस्पताल में ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है, तो वे भय के माहौल में मरीजों का इलाज कैसे करें।
जानकारी के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर के साथ मरीज के कुछ अटेंडरों का विवाद हो गया। आरोप है कि देखते ही देखते 8 से 10 लोग एकत्र हो गए और डॉक्टर के साथ मारपीट एवं अभद्रता की। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और अन्य डॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए।
घटना से आक्रोशित जूनियर डॉक्टर सोमवार सुबह से डीन कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। सभी विभागों के डॉक्टर आंदोलन में शामिल हैं और अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा की ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में आए दिन इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
धरने पर बैठे डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में अस्पताल में स्थायी सुरक्षा समिति का गठन, अतिरिक्त सुरक्षा गार्डों की तैनाती, पुलिस बल की नियमित मौजूदगी तथा डॉक्टरों से मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
इधर डॉक्टरों की हड़ताल का असर मरीजों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सुबह से ओपीडी और कई विभागों की सेवाएं प्रभावित हैं। दूर-दराज़ से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज घंटों डॉक्टरों के लौटने का इंतजार करते नजर आए।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टरों से चर्चा शुरू कर दी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल अस्पताल में यदि डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मरीजों की सुरक्षा और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा केवल उनकी नहीं, बल्कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले हर मरीज और कर्मचारी की भी प्राथमिक आवश्यकता है।



