विजयनगर पुलिस की FIR पर उठे गंभीर सवाल! शपथ पत्र के दावे से घिरी कार्रवाई, थाना प्रभारी अनिल पटेल के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग
SC/ST FIR को लेकर अधिवक्ता दीपांशु साहू ने एसपी जनसुनवाई में उठाई आवाज,शपथ पत्र में घटना से इनकार का दावा, थाना प्रभारी अनिल पटेल और अधिकारी खेमराज पवार की भूमिका पर सवाल

जबलपुर। विजयनगर थाना पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक गंभीर शिकायत अब एसपी जनसुनवाई तक पहुंच गई है। अधिवक्ता दीपांशु साहू ने विजयनगर थाने में दर्ज SC/ST एक्ट की FIR पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि जिस व्यक्ति के नाम और बयान को मामले से जोड़ा गया, उसी व्यक्ति के कथित शपथ पत्र में घटना को लेकर अलग तथ्य सामने आए हैं।
अधिवक्ता दीपांशु साहू के मुताबिक, 6 जनवरी 2026 को कृष्ण कुमार साहू के आवेदन के आधार पर विजयनगर थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि FIR में रोहित पथरोल वाल्मीकि के साथ मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया, लेकिन बाद में सामने आए कथित शपथ पत्र ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए।
अधिवक्ता दीपांशु साहू का दावा है कि कथित शपथ पत्र में रोहित पथरोल वाल्मीकि ने कहा है कि उसके साथ न तो मारपीट हुई, न ही उसके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और उसने पुलिस को इस तरह की किसी घटना की सूचना नहीं दी थी। शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी आरोप है कि रोहित पथरोल वाल्मीकि पर दबाव बनाकर FIR और बयान की कार्रवाई कराई गई।
यही कथित शपथ पत्र अब विजयनगर थाना प्रभारी अनिल पटेल की कार्रवाई को लेकर सवालों के घेरे में ला रहा है। अधिवक्ता दीपांशु साहू का आरोप है कि पर्याप्त स्वतंत्र साक्ष्यों के बिना गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई। उन्होंने थाना प्रभारी अनिल पटेल और अधिकारी खेमराज पवार पर भी भ्रष्टाचार तथा मामले की कार्रवाई को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस को FIR दर्ज करने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और घटना से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए थी। अब मांग की जा रही है कि FIR में दर्ज आरोपों, पुलिस द्वारा लिए गए बयानों, कथित शपथ पत्र और उपलब्ध साक्ष्यों का आपस में मिलान कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हालांकि, थाना प्रभारी अनिल पटेल और अधिकारी खेमराज पवार पर लगाए गए भ्रष्टाचार तथा दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना और जांच के निष्कर्ष बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए फिलहाल इन आरोपों को शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अधिवक्ता दीपांशु साहू ने एसपी जनसुनवाई में मांग की है कि मामले की जांच विजयनगर थाने से अलग किसी वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में FIR के तथ्यों और कथित शपथ पत्र के बीच गंभीर विरोधाभास सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित शपथ पत्र में घटना से इनकार का दावा सही है तो FIR किन साक्ष्यों के आधार पर दर्ज हुई? और यदि पुलिस के पास घटना से जुड़े ठोस सबूत मौजूद हैं, तो वे जांच में कब सामने आएंगे?
फिलहाल मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में पहुंच चुका है। विजयनगर थाना प्रभारी अनिल पटेल की कार्रवाई पर लगाए गए आरोपों और कथित शपथ पत्र की सच्चाई का फैसला अब निष्पक्ष जांच से ही होगा। मामले में सामने आए आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत कर रहा है; अंतिम सत्य जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा।



