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श्रीराम कॉलेज के 58 लाख के फीस घोटाले की EOW तक पहुंचेगी आंच! फीस की रसीदें हाथ में, फिर भी छात्रों को NOC नहीं, कॉलेज प्रबंधन पर धोखाधड़ी के आरोप, कलेक्टर की जांच कमेटी और पुलिस में शिकायत के बाद अब आर्थिक अपराध शाखा का दरवाजा खटखटाएगा MPSU
लव जिहाद और कॉलेज परिसर में छात्रा से दुष्कर्म के मामले भी रहे हैं चर्चा में, संचालकों पर कर्मचारियों के शोषण समेत कई गंभीर आरोप; छात्र संगठन ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की उठाई मांग

जबलपुर। शिक्षा के मंदिर में यदि विद्यार्थियों की फीस ही विवादों में घिर जाए, रसीदें होने के बावजूद उन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के लिए भटकना पड़े और लाखों रुपये के लेनदेन का हिसाब सवालों के घेरे में आ जाए, तो मामला केवल कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही तक सीमित नहीं रह जाता। जबलपुर के श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज में कथित 58 लाख रुपये के फीस गबन और धोखाधड़ी का मामला अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) तक पहुंचने की तैयारी में है। मध्यप्रदेश स्टूडेंट यूनियन (MPSU) ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शिकायत करने की बात कही है। इससे कॉलेज प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कॉलेज पहले भी विवादों के चलते सुर्खियों में रहा है। अब फीस के कथित घोटाले, छात्रों को NOC नहीं मिलने, जांच में अधूरी जानकारी दिए जाने के आरोप और पुलिस में लंबित शिकायतों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
रसीदें दिखाते रहे छात्र, फिर भी नहीं मिली NOC!-
मामले की शुरुआत उन छात्र-छात्राओं की शिकायतों से हुई, जिन्होंने कॉलेज में फीस जमा करने के बावजूद NOC नहीं मिलने की बात उठाई। विद्यार्थियों के पास फीस जमा करने की रसीदें होने के बावजूद उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के लिए परेशान होना पड़ा। इसके बाद छात्र संगठनों ने मामला उठाया और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग तेज कर दी।
सवाल यह है कि जब विद्यार्थियों ने फीस जमा की थी, तो उनके भुगतान का हिसाब कहां है? यदि प्रबंधन के रिकॉर्ड में फीस जमा नहीं दिखाई गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि राशि प्राप्त हुई थी, तो विद्यार्थियों को NOC देने में बाधा क्यों आई? इन्हीं सवालों के जवाब अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
EOW की शिकायत से खुल सकता है लेनदेन का पूरा हिसाब-
MPSU का आरोप है कि फीस से जुड़े इस मामले में करीब 58 लाख रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता की आशंका है। संगठन अब आर्थिक अपराध शाखा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है। शिकायत में उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर जांच की मांग की जाएगी। EOW में शिकायत पहुंचने के बाद यदि सक्षम एजेंसी मामले को जांच के लिए लेती है, तो फीस की रसीदों, कॉलेज के खातों, विद्यार्थियों से प्राप्त रकम, संबंधित बैंक लेनदेन और प्रबंधन के रिकॉर्ड का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि कथित अनियमितता हुई या नहीं और यदि हुई, तो उसमें किन लोगों की भूमिका थी।
कलेक्टर की जांच कमेटी, पुलिस में भी शिकायत-
छात्र संगठनों की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह तक पहुंचने के बाद मामले की जांच के लिए अधारताल एसडीएम के नेतृत्व में कमेटी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। MPSU का आरोप है कि जांच के दौरान कॉलेज प्रबंधन ने पूरी जानकारी प्रस्तुत नहीं की और वित्तीय लेनदेन का संपूर्ण हिसाब अब भी स्पष्ट होना बाकी है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि जांच को प्रभावित करने और मामले को दबाने के प्रयास किए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। वहीं, कॉलेज संचालक आर.के. करसौलिया सहित अन्य लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी, कथित गबन और कर्मचारियों के शोषण से संबंधित शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय और संबंधित थाने में की गई शिकायतों की स्थिति तथा उन पर हुई कार्रवाई स्पष्ट होना आवश्यक है।
गंभीर आरोपों से घिरा संस्थान, जवाबदेही तय करने की मांग-
कॉलेज से जुड़े विवादों में कथित लव जिहाद और परिसर में छात्रा से दुष्कर्म के मामले का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन मामलों की कानूनी स्थिति और आरोपों की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड एवं जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए। फिर भी, लगातार सामने आ रहे विवादों ने संस्थान की जवाबदेही और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को महत्वपूर्ण बना दिया है।
अभिषेक पांडे बोले, दोषियों पर हो कार्रवाई, जांच के नतीजे हों सार्वजनिक-
MPSU अध्यक्ष अभिषेक पांडे ने मांग की है कि विद्यार्थियों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले की निष्पक्ष जांच हो और वास्तविक दोषियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने और जांच को प्रभावित करने के कथित प्रयासों की शिकायत करने की बात कही है। पांडे का आरोप है कि 58 लाख रुपये से अधिक की फीस संबंधी कथित अनियमितताओं के अलावा भी कॉलेज प्रबंधन के वित्तीय लेनदेन की जांच जरूरी है। संगठन अब EOW में शिकायत कर मामले की विस्तृत जांच की मांग उठाने की तैयारी में है।
अब निगाहें जांच पर-
विद्यार्थियों की फीस का हिसाब, NOC रोके जाने की वजह, जांच कमेटी के निष्कर्ष और पुलिस में लंबित शिकायतों पर कार्रवाई इन सभी सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। आखिरकार, शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की मेहनत की कमाई से जुड़ा कोई भी मामला बिना स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच के अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता।