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जबलपुर में बेलगाम बदमाश! कहीं चाकू से गोदा, तो कहीं पिस्टल से बरसाईं गोलियां, कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल

बेखौफ बदमाशों का तांडव! सिहोरा में चाकूबाजी, संजीवनी नगर में फायरिंग,

लजबलपुर। जिले में अपराधियों के बढ़ते हौसलों ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीती रात दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई हिंसक घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि अपराधियों में कानून का डर लगातार कम होता जा रहा है। एक ओर सिहोरा में युवक पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया, वहीं दूसरी ओर संजीवनी नगर क्षेत्र में युवक पर पिस्टल से फायरिंग कर जान लेने की कोशिश की गई।

सिहोरा थाना क्षेत्र के ग्राम दर्शनी में पुरानी रंजिश और बातचीत को लेकर हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। शिकायत के अनुसार चिंटू उर्फ मुकुल लोधी पर शिवम रजक, दुर्गेश रजक और उनके एक साथी ने हमला कर दिया। आरोप है कि विवाद के दौरान चाकू से ताबड़तोड़ वार किए गए, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान पाए गए और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

वहीं संजीवनी नगर थाना क्षेत्र में आधी रात के समय पिस्टल से फायरिंग की घटना ने क्षेत्र में दहशत फैला दी। शिकायतकर्ता के अनुसार तेज रफ्तार कार चालक से विवाद के बाद इंगेश रजक ने कथित रूप से जातिसूचक गालियां दीं और बाद में पिस्टल लेकर वापस आया। आरोप है कि उसने जान से मारने की नीयत से गोली चलाई। गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी, अन्यथा बड़ी जनहानि हो सकती थी।

लगातार सामने आ रही चाकूबाजी और फायरिंग की घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो रहे हैं? आम नागरिकों का कहना है कि बदमाश अब खुलेआम हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें कानून का कोई भय नहीं दिखाई देता। शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाएं लोगों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल पुलिस व्यवस्था पर उठ रहा है। जब अपराधी खुलेआम चाकू और पिस्टल लेकर घूम रहे हैं तो उनकी गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं हो रही? आखिर ऐसी घटनाओं के बाद ही कार्रवाई क्यों शुरू होती है? यदि समय रहते सख्ती बरती जाए तो शायद कई वारदातों को रोका जा सकता है।

फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन जनता अब केवल एफआईआर नहीं, बल्कि अपराधियों पर ऐसी कार्रवाई चाहती है जिससे शहर में कानून का खौफ दोबारा स्थापित हो सके।

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