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भक्ति से झूम उठा वृद्ध आश्रम, सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के श्रीमुख से गूंजा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का दिव्य संदेश

भक्ति से झूम उठा वृद्ध आश्रम, सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के श्रीमुख से गूंजा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का दिव्य संदेश

जबलपुर। जहां उम्र की सांझ में कई चेहरे अपनों के स्नेह को तरसते हैं, वहीं निराश्रित वृद्ध आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा ने बुजुर्गों के जीवन में नई खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पूरा आश्रम भक्ति, उल्लास और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष और मधुर भजनों के बीच वृद्धजन स्वयं को रोक नहीं सके और भक्ति में झूमते हुए नृत्य कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां मनाईं।

व्यास पीठ पर विराजमान प्रसिद्ध कथावाचक सुरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज, जो शिव मंदिर कचनार सिटी (बड़े शंकर जी) के मुख्य आचार्य एवं मां दक्षिणेश्वरी धाम के संस्थापक हैं, ने ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद, समुद्र मंथन, वामन अवतार और भगवान श्रीकृष्ण जन्म की अमृतमयी कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, सेवा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

वृद्ध आश्रम की अधीक्षक रेवेन्दु सिंह ने बताया कि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष एवं कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के मार्गदर्शन और अनुमोदन से यह निःशुल्क श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। कथा के दौरान पंडित अमित उपाध्याय एवं संजय उपाध्याय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन संपन्न कराया।

भक्ति की इस संगीतमय संध्या को शरद तिवारी ने अपने मधुर भजनों से और अधिक भावपूर्ण बना दिया। उनके साथ शिवा विश्वकर्मा और नितिन ने भी भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में डॉ. सारिका झा, सेवानिवृत्त जेलर अभय वर्मा, पत्रकार सुनील सेन, प्रीति श्रीवास्तव, संध्या चतुर्वेदी, अंजना शुक्ला, उर्मिला पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भगवान को गुड़ के लड्डू, हरीरा, माखन-मिश्री, खीर और फलों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद प्रसाद सभी वृद्धजनों में वितरित किया गया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भक्ति, सेवा और अपनापन किसी भी जीवन को आनंद और आशा से भर सकते हैं। निराश्रित वृद्ध आश्रम में आयोजित यह कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव सेवा और संस्कारों का एक प्रेरणादायक उत्सव बन गई।

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