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मझौली हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल, विधायक अजय विश्नोई पर ठाकुर मनोहर सिंह का तीखा हमला -दो युवाओं की मौत और एक के गंभीर होने के बाद अस्पताल की बदहाली, एंबुलेंस में डीजल और ऑक्सीजन की कमी पर उठाए सवाल; पाटन की सियासत में सोशल मीडिया पोस्ट से मची हलचल

जबलपुर। मझौली में करंट लगने से दो युवाओं की मौत और एक अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की घटना अब राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनती नजर आ रही है। हादसे के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, एंबुलेंस में डीजल की कथित कमी और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने को लेकर कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके ठाकुर विक्रम सिंह के बड़े भाई ठाकुर मनोहर सिंह ने क्षेत्रीय विधायक अजय विश्नोई पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर सामने आई उनकी पोस्ट ने पाटन विधानसभा की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। खास बात यह है कि मनोहर सिंह ने सीधे विधायक के नेतृत्व, कार्यशैली और कथित संरक्षण की राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
हादसे के बहाने व्यवस्था और जनप्रतिनिधित्व पर सवाल-
ठाकुर मनोहर सिंह ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि 22 अक्टूबर को मझौली में करंट लगने से दो युवाओं की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय मझौली अस्पताल की एंबुलेंस में डीजल उपलब्ध नहीं था। घायलों को तत्काल रेफर करने की जरूरत पड़ी तो डीजल लेने के लिए कुप्पी लेकर भेजने जैसी स्थिति बनी। उनके मुताबिक, अस्पताल में ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। मनोहर सिंह ने यह भी कहा कि शांति समिति की बैठक में सदस्यों ने नीचे झूल रहे बिजली के तारों को ऊपर कराने का मुद्दा उठाया था, लेकिन विद्युत विभाग के अधिकारियों ने इस पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। उन्होंने व्यवस्था की इन कथित खामियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
संरक्षण की राजनीति पर सीधा प्रहार-
अपनी पोस्ट में मनोहर सिंह ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण जवाबदेही कमजोर पड़ रही है। उन्होंने विधायक पर संरक्षण की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि यदि जनता की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? उन्होंने जनप्रतिनिधियों के प्रति जनता के व्यवहार और मतदान के दौरान धनबल के कथित प्रभाव पर भी टिप्पणी की। मनोहर सिंह का कहना है कि जनता को ऐसे प्रतिनिधियों का मूल्यांकन उनके व्यवहार और संकट के समय उनकी भूमिका के आधार पर करना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन के दौरान विधायक के व्यवहार पर भी निशाना-
मनोहर सिंह ने हादसे के बाद लोगों द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचे विधायक का व्यवहार संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं था। उन्होंने विधायक की कथित भाषा और रवैये को अमानवीय बताते हुए कहा कि शोकाकुल परिवारों और आक्रोशित लोगों के बीच जनप्रतिनिधि से संयम तथा संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने लोगों से संबंधित वीडियो देखने की अपील भी की है। हालांकि, वीडियो में दिख रही परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अपनी ही सरकार पर हमलावर रहे हैं विश्नोई-
भाजपा विधायक अजय विश्नोई पूर्व में भी अपनी ही पार्टी की सरकार और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अब मनोहर सिंह की ओर से सार्वजनिक रूप से उन पर निशाना साधे जाने को पाटन विधानसभा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर उठती बहस के रूप में देखा जा रहा है। ठाकुर विक्रम सिंह के परिवार की क्षेत्र में राजनीतिक पहचान और मनोहर सिंह की इस मुखर टिप्पणी ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि विधायक अजय विश्नोई इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और मझौली की घटना के बाद अस्पताल तथा बिजली व्यवस्था से जुड़े सवालों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
होनी चाहिए निष्पक्ष जांच-
बहरहाल दो युवाओं की मौत का यह हादसा केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बिजली के तारों की स्थिति, अस्पताल की आपातकालीन सुविधाओं और एंबुलेंस की उपलब्धता की निष्पक्ष जांच के साथ जवाबदेही तय होना जरूरी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों को न्याय और क्षेत्रवासियों को सुरक्षित व्यवस्था मिलना ही सबसे बड़ा सवाल है।