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(जबलपुर) लोक सेवा गारंटी कानून की अनदेखी पड़ी महंगी, 22 अधिकारियों-कर्मचारियों पर 34,500 रुपये का जुर्माना

समय सीमा में सेवाएं नहीं देने पर कलेक्टर का सख्त एक्शन, एसडीएम से लेकर पंचायत सचिव तक दंडित

सेटन्यूज़, जबलपुर। आम नागरिकों को समयबद्ध तरीके से शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा में सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने के मामलों में जिले के 22 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कुल 34 हजार 500 रुपये का अर्थदंड लगाया है।

प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में राजस्व विभाग के अधिकारियों से लेकर विभिन्न जनपद पंचायतों के पंचायत सचिव तक शामिल हैं। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दंडित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पांच दिवस के भीतर साइबर ट्रेजरी के माध्यम से शासन के खाते में निर्धारित राशि जमा करनी होगी तथा उसकी रसीद लोक सेवा प्रबंधन विभाग को प्रस्तुत करनी होगी। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं की जाती है तो यह रकम संबंधित कर्मचारियों के वेतन से वसूल की जाएगी।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करना

लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं तय समय सीमा में उपलब्ध कराना है। अधिनियम के तहत सेवा में देरी होने या निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी माना जाता है और उसके विरुद्ध आर्थिक दंड की कार्रवाई की जा सकती है।

जिला प्रशासन द्वारा की गई समीक्षा में पाया गया कि कई मामलों में आवेदकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से जवाबदेही बढ़ेगी और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता तथा गति में सुधार आएगा।

एसडीएम, अतिरिक्त तहसीलदार और पंचायत सचिवों पर कार्रवाई

दंडित अधिकारियों में रांझी की एसडीएम मोनिका बाघमारे पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा रांझी के अतिरिक्त तहसीलदार भीमसेन पटेल पर 250 रुपये तथा गोरखपुर के अतिरिक्त तहसीलदार आदित्य जंघेला पर 500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

सबसे अधिक कार्रवाई विभिन्न जनपद पंचायतों के पंचायत सचिवों पर हुई है। सिहोरा जनपद की ग्राम पंचायत कुशयारी के सचिव संदीप सिंह ठाकुर तथा कुंडम जनपद की ग्राम पंचायत भैंसवाही के सचिव जियालाल मार्को पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जो इस कार्रवाई में सर्वाधिक दंड राशि है।

इसके अलावा बिलपठार ग्राम पंचायत के सचिव थम्मन सिंह पटेल पर 3,750 रुपये, मोहनी ग्राम पंचायत की सचिव कल्पना पूसाम पर 3,000 रुपये, महगवां की सचिव सविता मांझी पर 2,500 रुपये तथा जामगांव के सचिव प्रमोद कुशराम पर 2,000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।

अन्य पंचायत सचिवों पर भी 250 रुपये से लेकर 1,750 रुपये तक की दंडात्मक कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत इस प्रकार की कार्रवाई से सरकारी सेवाओं की जवाबदेही मजबूत होती है। जब अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से आर्थिक दंड का सामना करना पड़ता है, तो वे समयसीमा के भीतर कार्य निष्पादन के प्रति अधिक गंभीर होते हैं। इससे नागरिकों को प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, पंचायत स्तर की सुविधाएं तथा अन्य सरकारी सेवाएं समय पर मिलने की संभावना बढ़ती है।

जबलपुर जिला प्रशासन की यह कार्रवाई उन सभी शासकीय विभागों के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है कि नागरिक सेवाओं में देरी को अब सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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