बिहार में छात्र-युवा आंदोलन को लेकर तेज हुई सियासत: AISA और वामपंथी नेताओं ने डीजीपी को सौंपा ज्ञापन, जंतर-मंतर समझौते को लागू करने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की उठाई मांग
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पुलिस प्रमुख से मुलाकात कर छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में दमनात्मक कार्रवाई रोकने, गिरफ्तार आंदोलनकारियों की रिहाई और दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की।

साईडलुक, डेस्क। बिहार में छात्र-युवा आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही हैं। छात्र संगठन AISA और विभिन्न वामपंथी संगठनों के नेताओं ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को ज्ञापन सौंपकर छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा ने किया। उनके साथ CPI(ML) के विधायक कॉमरेड अरुण (काराकाट), RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अजीत कुशवाहा, शिव प्रकाश रंजन तथा कॉमरेड कुमार परवेज़ भी मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद जिन मांगों और समझौतों पर सहमति बनी थी, उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि समझौते के बावजूद विभिन्न स्थानों पर छात्र-युवा आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियां और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कॉमरेड नेहा ने कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। यदि छात्र अपनी शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर आवाज़ उठाते हैं, तो उनके विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को संवाद की प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि विवादों का समाधान संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए तथा उनके विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मुकदमे वापस लिए जाएं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि कई मामलों में छात्रों पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिससे उनके भविष्य और करियर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
CPI(ML) विधायक कॉमरेड अरुण ने कहा कि छात्र-युवा आंदोलन को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखने के बजाय सरकार को उसके मूल कारणों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रियाओं और युवाओं की समस्याओं पर व्यापक संवाद की आवश्यकता बताई।
RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अजीत कुशवाहा ने कहा कि छात्र-युवा आंदोलनों का लोकतांत्रिक इतिहास रहा है और प्रशासन को ऐसे आंदोलनों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगों को समय रहते गंभीरता से सुना जाए तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता है।
शिव प्रकाश रंजन और कॉमरेड कुमार परवेज़ ने भी प्रशासन से आग्रह किया कि आंदोलन से जुड़े मामलों में निष्पक्ष समीक्षा कर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए इन पर संवेदनशील और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी से अनुरोध किया कि राज्य भर में छात्र आंदोलनों के संबंध में पुलिस को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के विरुद्ध अनावश्यक बल प्रयोग, गिरफ्तारी अथवा दमनात्मक कार्रवाई न हो। साथ ही जंतर-मंतर आंदोलन से संबंधित सहमतियों को लागू करने की दिशा में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
उधर, इस ज्ञापन के बाद बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं तथा ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।



