आंदोलन या पैसों का दबाव? कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक पर 50 हजार मांगने का आरोप, वायरल ऑडियो ने खड़े किए सवाल
शराब दुकान के विरोध में किया था आंदोलन,विरोध प्रदर्शन या वसूली का दबाव? कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक पर गंभीर आरोप

जबलपुर के धनवंतरी नगर से कांग्रेस की राजनीति और विरोध प्रदर्शन को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अभिषेक पाठक पर शराब दुकान के कर्मचारी से 50 हजार रुपये मांगने का आरोप है। कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन दुकान पक्ष के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।
शराब दुकान का विरोध, फिर पैसों की मांग का आरोप—
बताया जा रहा है कि अप्रैल में धनवंतरी नगर में शराब दुकान खोले जाने का अभिषेक पाठक ने विरोध किया था। इसके बाद प्रदर्शन और विरोध के जरिए दुकान संचालक पर दबाव बनाए जाने के आरोप लगे। अब सवाल उठ रहा है कि विरोध वास्तव में जनहित का मुद्दा था या इसके पीछे कोई दूसरा विवाद भी जुड़ा हुआ था?
दुकान मालिक और कर्मचारी के आरोप—
शराब दुकान मालिक रवि मांझी और कर्मचारी नीरज श्रीवास्तव ने कथित घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी है। दुकान पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन नहीं करने के एवज में पैसों की मांग की गई। वायरल ऑडियो को इसी आरोप से जोड़कर देखा जा रहा है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मारपीट का वीडियो भी सामने आया—
मामले के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें अभिषेक पाठक और कुछ युवक एक युवक के घर में पहुंचकर उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो की तारीख, स्थान और पूरी परिस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस शिकायत की स्थिति भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
अब सवाल नेताओं की जवाबदेही पर—
जनता के सामने सवाल सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि राजनीति में विरोध और जनहित के नाम पर होने वाली गतिविधियों की पारदर्शिता का भी है। अगर कोई नेता जनता की समस्या को लेकर आंदोलन करता है तो उसकी मांग और उसका तरीका दोनों सवालों के घेरे में आने चाहिए। वहीं किसी भी नेता पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।
कांग्रेस बनाम बीजेपी नहीं, मुद्दा जवाबदेही का—
राजनीति में कांग्रेस हो या बीजेपी—जनता नेताओं के काम, व्यवहार और जवाबदेही को देखकर सवाल पूछती है। इस मामले में भी फैसला सोशल मीडिया के वायरल ऑडियो-वीडियो से नहीं, बल्कि तथ्य, जांच और संबंधित पक्षों के जवाब से होना चाहिए। फिलहाल अभिषेक पाठक पर लगे आरोपों की पुष्टि बाकी है, और यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है।



