अस्पताल में नशे का तांडव! लेडी एल्गिन से विक्टोरिया तक सुरक्षा व्यवस्था बेदम, जिम्मेदार कौन?
अस्पताल में नशे का तांडव! लेडी एल्गिन से विक्टोरिया तक सुरक्षा व्यवस्था बेदम, जिम्मेदार कौन?

जबलपुर के शासकीय लेडी एल्गिन अस्पताल में रात करीब 3:30 बजे नशे में धुत लोगों के बीच मारपीट और हंगामे का मामला सामने आया है। महिला अस्पताल के मुख्य गेट पर हुए इस हंगामे ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह है कि जिस वक्त मरीज इलाज और सुरक्षा की उम्मीद में अस्पताल में मौजूद थे, उस समय नशे में लोग अस्पताल के गेट पर खुलेआम हंगामा कैसे कर रहे थे?
डायल-112 पहुंची, फिर भी नहीं थमा विवाद,
हंगामे की सूचना पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि इस दौरान नशे में मौजूद लोगों ने पुलिसकर्मियों से भी बहस की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब यह मामला और गंभीर हो गया है। सवाल उठता है कि अस्पताल परिसर में पुलिस या सुरक्षा व्यवस्था की मौजूदगी के बावजूद ऐसी स्थिति बनने तक इंतजार क्यों करना पड़ा?
विक्टोरिया अस्पताल में शराब पीती महिला का वीडियो,
मामला यहीं खत्म नहीं होता। शासकीय विक्टोरिया अस्पताल से सामने आए एक अन्य वीडियो में एक महिला अस्पताल परिसर में शराब पीती हुई दिखाई दे रही है। यानी एक तरफ लेडी एल्गिन में नशे में हंगामा और दूसरी तरफ विक्टोरिया अस्पताल परिसर में शराब सेवन का वीडियो—दोनों घटनाएं अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सुरक्षा गार्ड कहां थे?
सबसे बड़ा सवाल अस्पताल प्रबंधन से है—क्या अस्पतालों में सुरक्षा के लिए पर्याप्त गार्ड मौजूद हैं? अगर मौजूद हैं तो रात में मुख्य गेट पर नशे में लोग मारपीट कैसे कर रहे थे? और यदि अस्पताल परिसर में शराब सेवन का वीडियो सामने आ रहा है, तो निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की है?
मरीजों और महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़?
अस्पताल कोई सार्वजनिक अड्डा नहीं, बल्कि संवेदनशील चिकित्सा संस्थान हैं। यहां मरीज, महिलाएं, बच्चे और उनके परिजन इलाज के लिए आते हैं। ऐसे परिसर में नशे में हंगामा या शराब सेवन की घटनाएं केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल हैं।
एडिशनल एसपी ने लिया संज्ञान,
पूरे मामले में एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए सिविल लाइन थाना प्रभारी को संबंधित लोगों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाया जाता है।
अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही कब तय होगी?
पुलिस कार्रवाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन सवाल अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी का भी है। आखिर अस्पताल परिसर में सुरक्षा की निगरानी कौन करता है? क्या रात के समय नियमित पेट्रोलिंग होती है? क्या मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं? अगर रहते हैं तो ऐसी घटनाएं उनकी नजर से कैसे निकल गईं?
वीडियो ने खोल दी व्यवस्था की पोल,
इन दोनों वीडियो ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था कागजों पर मजबूत है या जमीन पर भी। यदि अस्पताल परिसर में नशे का सेवन और मुख्य गेट पर मारपीट जैसी घटनाएं सामने आती रहेंगी, तो मरीज और उनके परिजन खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेंगे?
अब कार्रवाई सिर्फ नशेड़ियों पर नहीं, व्यवस्था पर भी जरूरी,
जरूरत केवल वीडियो में नजर आ रहे लोगों पर कार्रवाई की नहीं है। अस्पताल प्रबंधन को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। सुरक्षा गार्डों की तैनाती, रात की निगरानी और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस समन्वय की व्यवस्था को प्रभावी बनाना होगा।
सवाल सीधा है—जबलपुर के सरकारी अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए जाएं या सुरक्षा की चिंता लेकर? लेडी एल्गिन और विक्टोरिया अस्पताल के वीडियो सामने आने के बाद अब जिम्मेदार विभागों को जवाब देना होगा कि अस्पताल परिसर में नशे का यह खेल आखिर कब रुकेगा और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?



