ऋषि रेजेंसी शराब विवाद में बड़ा सवाल: लाल पट्टी वाले आखिर हैं कौन? पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
ऋषि रेजेंसी शराब विवाद में बड़ा सवाल: लाल पट्टी वाले आखिर हैं कौन? पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

जबलपुर के ऋषि रेजेंसी से सामने आए शराब विवाद ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि उस पूरी कार्रवाई का है जिसमें लाल पट्टी लगाए कुछ लोग शराब पकड़ते नजर आए। आखिर ये लोग कौन हैं? क्या इन्हें शराब की जांच, पकड़ने या जब्ती करने का कानूनी अधिकार है? अगर अधिकार है तो किस विभाग ने दिया और किस अधिकारी के आदेश पर दिया?
कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया?
अगर किसी को कहीं अवैध शराब दिखाई देती है तो कानून के मुताबिक इसकी सूचना पुलिस या आबकारी विभाग को दी जानी चाहिए। लेकिन इस मामले में आरोप है कि शराब को लेकर विवाद के बीच निजी लोगों की भूमिका सामने आई और मामला इतना बढ़ गया कि मारपीट के आरोप भी लगाए गए।
सवाल यह है कि अगर शराब अवैध थी तो मौके पर पुलिस और आबकारी विभाग क्यों नहीं पहुंचा? और अगर शराब वैध थी तो फिर उसे पकड़ने की कोशिश किस अधिकार के तहत की गई?
शराब पकड़ने वाले लाल पट्टी वालों की जांच जरूरी,
सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि लाल पट्टी वाले लोगों की पहचान क्या है और वे किस संगठन या संस्था से जुड़े हैं। क्या उनके पास कोई वैधानिक अधिकार या लिखित अनुमति है? क्या किसी सरकारी विभाग ने उन्हें कार्रवाई के लिए अधिकृत किया है?
अगर ऐसा कोई आदेश या अधिकार नहीं है, तो फिर किसी व्यक्ति को रोकना, उसका मोबाइल लेना या उसके साथ मारपीट करना कानून की नजर में कैसे उचित हो सकता है—यह जांच का विषय है।
पुलिस और आबकारी विभाग पर भी सवाल,
अवैध शराब की बिक्री और परिवहन रोकने की जिम्मेदारी आखिर पुलिस और आबकारी विभाग की है। फिर सवाल उठता है कि विभाग की कार्रवाई कहां थी? क्या अधिकारियों को शराब के इस कथित कारोबार की जानकारी नहीं थी? क्या नियमित निगरानी नहीं हो रही थी?
जनता पूछ रही है—जब शराब खुलेआम पकड़े जाने के दावे हो रहे हैं, तो सरकारी अमला कहां था?
मारपीट की वजह शराब थी या कुछ और?
इस पूरे विवाद में मारपीट के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि शराब उतारे जाने का वीडियो बनाने के बाद उसे होटल के अंदर ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई और मोबाइल छीना गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
लेकिन सवाल बड़ा है—आखिर शराब को लेकर विवाद मारपीट तक क्यों पहुंचा? क्या इसके पीछे सिर्फ शराब का मामला था या विवाद की कोई दूसरी वजह भी थी?
CSP सोनू कुर्मी की जांच से खुलेगा सच,
पुलिस की ओर से CSP सोनू कुर्मी ने दोनों पक्षों की जांच, CCTV फुटेज, बयान और शराब वैध थी या नहीं, इसकी पड़ताल की बात कही है। अब जांच में यह साफ होना चाहिए कि शराब कहां से आई, किसकी थी, उसे कौन लेकर आया और उसे पकड़ने की कार्रवाई करने वाले लोग किस अधिकार के तहत वहां मौजूद थे।
कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए,
चाहे कोई होटल हो, शराब कारोबारी हो, कोई संगठन हो या फिर कोई सरकारी अधिकारी—कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। अगर शराब अवैध थी तो पुलिस और आबकारी विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए थी। अगर कार्रवाई करने वालों के पास अधिकार नहीं था तो उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अब जनता को इंतजार है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर लाल पट्टी वालों से लेकर पुलिस और आबकारी विभाग तक, हर जिम्मेदार पक्ष की भूमिका की निष्पक्ष जांच सामने आती है।



