कोरोना में मानवता निभाने वाले समाजसेवी के सवालों से हिला शहर, प्राइवेट अस्पतालों पर फर्जी डॉक्टर, आयुष्मान घोटाले, रिकॉर्ड छुपाने और मेट्रो से अपोलो तक की उठी जांच की मांग, कोरोना काल के ‘सेवक’ आज अस्पताल व्यवस्था पर उठा रहे सवाल
कोरोना में मानवता निभाने वाले समाजसेवी के सवालों से हिला शहर, प्राइवेट अस्पतालों पर फर्जी डॉक्टर, आयुष्मान घोटाले, रिकॉर्ड छुपाने और मेट्रो से अपोलो तक की उठी जांच की मांग, कोरोना काल के ‘सेवक’ आज अस्पताल व्यवस्था पर उठा रहे सवाल

सुनील सेन SET NEWS,जबलपुर। कोरोना महामारी के भयावह दौर में जब लोग अपनों से दूरी बना रहे थे, तब कुछ चेहरे ऐसे भी थे जिन्होंने मानवता को जिंदा रखा। ‘मोक्ष’ संस्था के संस्थापक आशीष ठाकुर ने उस समय लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर समाज के सामने मिसाल पेश की थी। आज वही आशीष ठाकुर एक निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
इलाज में लापरवाही और सिस्टम पर सवाल-
आशीष ठाकुर का आरोप है कि 17 जुलाई 2026 को पेट दर्द की शिकायत पर उन्हें मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती गई। परिजनों के अनुसार डिस्चार्ज में देरी की गई और इंश्योरेंस प्रक्रिया का हवाला देकर उन्हें रोका गया। बाद में मेडिकल कॉलेज में उपचार मिलने पर उनकी जान बच सकी।
डॉक्टर के लिबास पर संचालन, गंभीर आरोप-
हाल ही में पांच लोगों की हत्या में शामिल फ़र्जी डॉक्टर अमित खरे की डिग्री और फर्जीवाड़ा का मामला अभी ठंडा ही नहीं हुआ था। ऐसे में अस्पताल में कथित रूप से BAMS डॉक्टरों और प्राइवेट नर्सिंग स्टाफ के साथ अस्पताल संचालक सौरभ बड़ेरिया के भाई राजू उर्फ राजीव को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। अस्पताल में दाखिल हुए मरीज़ और उनके परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि राजू पूरे अस्पताल में खुद को डॉक्टर बताकर घूमता है, जबकि सौरभ खुद को बड़े नेताओं का करीबी बताकर उनके साथ फोटो दिखाकर प्रभाव जमाने की कोशिश करता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आयुष्मान, CGHS और मेडिक्लेम की जांच की मांग-
अस्पताल में दाखिल हुए और बगैर इलाज के लाखों गवां कर सरकारी अस्पताल पहुंचे पुलिस, सरकारी कर्मचारियों ने लिखित में आगे आकर यह मांग CMHO से की हैं कि यह जानकारी सार्वजनिक की जाए कि आयुष्मान भारत, CGHS और मेडिक्लेम के तहत कितने मरीज कब-कब भर्ती हुए, उनकी तारीख, समय और पूरा रिकॉर्ड क्या है। इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच जल्द होनी चाहिए ताकि प्राइवेट अस्पतालों पर लगाम लगाई जा सके।
मेट्रो से मेट्रो प्राइम और अपोलो तक सवाल-
आशीष ठाकुर के खुले तौर पर सामने आने के बाद शहर के कई पीड़ित सामने आए हैं उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि मेट्रो हॉस्पिटल कैसे मेट्रो प्राइम बड़ेरिया में तब्दील हुआ, इसकी जमीन किसकी है, इसमें कौन-कौन पार्टनर हैं और स्वीकृति किस प्रक्रिया से मिली। अब अपोलो अस्पताल के निर्माण और उसकी अनुमति प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है, ताकि भविष्य में कोई बड़ा विवाद न खड़ा हो।
आपराधिक कनेक्शन और पब संचालन पर आरोप-
सूत्रों के मुताबिक बताया जाता है कि दिवंगत हिस्ट्रीशीटर बबलू पंडा के करीबी माने जाने वाले सुखेन्द्र तिवारी इन दिनों अस्पताल संचालक सौरभ का पूरा काम देख रहा है। जिसमें मयूर उसका साझेदार हैं। बताया जाता है कि सुखेन्द्र, अस्पताल संचालक और स्वयं-भू उद्योगपति बने सौरभ बड़ेरिया का खास शूटर माना जाता है और साइकिल सेकंड से लेकर दीनदयाल चौक स्थित डी-कासा पब का संचालन करता है, जिस पर पहले पुलिस ने रेड कर कार्रवाई की थी।
निष्पक्ष जांच की मांग-
पूरा मामला अब केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी अस्पतालों की पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल बन गया है। पीड़ितों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच सामने आ सके और मरीजों का भरोसा व्यवस्था पर बना रहे।



