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खाकी ने निभाया इंसानियत का फर्ज! बरगी TI नीलेश दोहरे और उनकी टीम ने 24 घंटे में पश्चिम बंगाल के बिछड़े बेटे को परिवार से मिलाया

जबलपुर। वर्दी की पहचान सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई और कानून का पालन कराने से नहीं होती, बल्कि असहाय और जरूरतमंदों के लिए सहारा बनने से भी होती है। जब कोई अपना रास्ता भटक जाए, अपनों से दूर हो जाए और अपनी पहचान तक बताने में असमर्थ हो, तब पुलिस की संवेदनशीलता ही उसके लिए उम्मीद की किरण बनती है। जबलपुर के बरगी थाना पुलिस ने ऐसा ही मानवीय उदाहरण पेश कर खाकी का सम्मान बढ़ाया है।

ग्राम सुकरी में मिला बेसहारा युवक, FRV-06 टीम ने दिखाई तत्परता,
30 अक्टूबर 2026 की सुबह ग्राम सुकरी में एक अज्ञात युवक के मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में घूमने की सूचना जागरूक नागरिक तोपन्स भाईराम ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही एफआरवी-06 की टीम बिना देर किए मौके पर पहुंची। युवक अपना नाम और पता बताने में असमर्थ था। वह केवल पश्चिम बंगाल का निवासी होने की जानकारी दे पा रहा था। ऐसे में पुलिस टीम ने उसे केवल एक अज्ञात व्यक्ति समझकर नहीं छोड़ा, बल्कि उसकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया।

TI नीलेश दोहरे के नेतृत्व में शुरू हुई परिवार की तलाश,
मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। युवक की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे सुखसागर अस्पताल, मुकुनवारा में भर्ती कराया गया और उसकी देखरेख के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया। इस दौरान थाना प्रभारी नीलेश दोहरे के नेतृत्व में बरगी पुलिस ने युवक की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचने के प्रयास लगातार जारी रखे। अस्पताल में संवेदनशीलता के साथ बातचीत की गई, ताकि युवक को किसी तरह की परेशानी न हो और उससे जरूरी जानकारी मिल सके।

पश्चिम बंगाल पुलिस से संपर्क, मिली परिवार की जानकारी,
लगातार प्रयासों के बाद युवक ने अपने पिता का नाम अजीत रूईदास और पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल थाना क्षेत्र का पता बताया। इसके बाद बरगी पुलिस ने तत्काल पश्चिम बंगाल के थाना खानाकुल से संपर्क साधा। स्थानीय पुलिस के सहयोग से परिजनों का पता लगाया गया और फोन पर युवक की बात परिवार से कराई गई। परिजनों ने उसकी पहचान पंचा रूईदास, उम्र 27 वर्ष के रूप में की। उन्होंने बताया कि पंचा मानसिक रूप से अस्वस्थ है और घर से लापता हो गया था।

24 घंटे में खत्म हुआ इंतजार, परिवार से मिला बिछड़ा बेटा,
31 अक्टूबर को पंचा के पिता अजीत रूईदास, भाई तापोस रूईदास और छोटे भाई सौरव जबलपुर पहुंचे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के साथ वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई। इसके बाद पुलिस ने पंचा को सकुशल उसके पिता और भाइयों के सुपुर्द कर दिया। लंबे इंतजार के बाद अपने बेटे को सुरक्षित सामने देखकर परिजनों की आंखें खुशी से नम हो गईं। उन्होंने बरगी पुलिस और अस्पताल प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।

बरगी पुलिस की टीम ने पेश की सेवा और संवेदना की मिसाल,
इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी नीलेश दोहरे के नेतृत्व में बरगी थाना पुलिस और एफआरवी-06 की टीम ने जिस तत्परता, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ काम किया, वह सराहनीय है। ग्राम सुकरी से अस्पताल तक युवक की सुरक्षा, पहचान के लिए लगातार प्रयास और दूसरे राज्य की पुलिस से समन्वय—हर स्तर पर टीम ने जिम्मेदारी निभाई।

बरगी पुलिस की यह पहल बताती है कि खाकी सिर्फ कानून की ताकत नहीं, बल्कि जरूरतमंद के लिए भरोसे और इंसानियत का दूसरा नाम भी है। 24 घंटे के भीतर एक बिछड़े बेटे को उसके परिवार से मिलाना केवल पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक परिवार की खुशियां लौटाने का मानवीय प्रयास है।

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