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जबलपुर के बेलखेड़ा थाने में जब्त वाहनों के कबाड़ की कथित हेराफेरी! थाने के भीतर से पार्ट्स गायब होने का आरोप, थाना प्रभारी अनिल पटेल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर। जिस पुलिस थाने में कानून की रखवाली और जब्त संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी बेलखेड़ा थाने के परिसर से जब्त वाहनों के लोहे के पार्ट्स और कबाड़ को कथित तौर पर बाहर ले जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। वीडियो में थाने के परिसर में पुराने वाहनों के पार्ट्स और कबाड़ को हटाए जाने जैसी गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। आरोप यह भी हैं कि पुलिस स्टाफ की मौजूदगी में कबाड़ कारोबारियों तक जब्त वाहनों का सामान पहुंचाया जा रहा था।

थाने के भीतर आखिर किसकी अनुमति से निकला कबाड़?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन वाहनों को पुलिस ने अलग-अलग मामलों में जब्त कर थाने में सुरक्षित रखा था, उनके पार्ट्स निकालने या कबाड़ के रूप में बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी? क्या इसके लिए न्यायालय से कोई आदेश प्राप्त किया गया था? यदि नहीं, तो थाने के परिसर से जब्त संपत्ति को हटाने की हिम्मत किसके संरक्षण में दिखाई गई? मामला केवल लोहे के कुछ टुकड़ों का नहीं, बल्कि पुलिस की अभिरक्षा में रखी जब्त संपत्ति की सुरक्षा और जवाबदेही का है।

थाना प्रभारी अनिल पटेल की जिम्मेदारी पर सवाल,
बेलखेड़ा थाने के प्रभारी अनिल पटेल हैं। ऐसे में थाने के भीतर जब्त वाहनों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी से थाना प्रभारी को अलग नहीं किया जा सकता। सवाल यह भी है कि थाने के परिसर में यदि इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं, तो क्या थाना प्रभारी को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो थाने की व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठना लाजिमी है। थाना प्रभारी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किए जाने के बावजूद, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी ओर से जवाब नहीं मिल सका। हालांकि, केवल फोन का जवाब नहीं मिलना किसी की संलिप्तता का प्रमाण नहीं है, लेकिन गंभीर आरोपों पर थाना प्रभारी का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

एएसपी अंजना तिवारी ने लिया संज्ञान, मांगी रिपोर्ट,
मामले को लेकर एएसपी अंजना तिवारी ने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि वीडियो की जांच कराई जा रही है और बेलखेड़ा थाना प्रभारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब्त वाहन न्यायालयीन प्रक्रिया और प्रकरणों के चलते थाने के परिसर में रखे जाते हैं। छोटे जब्त सामान को मालखाने में रखा जाता है, जबकि बड़े वाहन परिसर में खड़े किए जाते हैं। यदि जब्त वाहनों के पार्ट्स या अन्य संपत्ति को बिना वैधानिक अनुमति हटाया या बेचा गया है, तो यह गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जांच में सिर्फ वीडियो नहीं, रिकॉर्ड भी खंगालना जरूरी,
इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के लिए जब्ती रजिस्टर, मालखाना रिकॉर्ड, वाहनों की स्थिति, परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका और कबाड़ ले जाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी है। यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कबाड़ किसे दिया गया, किसके आदेश पर दिया गया और उससे प्राप्त राशि का कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं। यदि किसी पुलिसकर्मी ने कबाड़ कारोबारियों से मिलीभगत कर जब्त संपत्ति को खुर्द-बुर्द किया है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

अब निगाहें पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर,
बेलखेड़ा थाने का वायरल वीडियो कई गंभीर सवाल छोड़ रहा है। क्या जांच में थाना प्रभारी की भूमिका स्पष्ट होगी? क्या जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी या मामला केवल रिपोर्ट और जांच तक सीमित रह जाएगा? जब्त संपत्ति जनता के विश्वास और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी होती है। उसकी कथित हेराफेरी पर पर्दा नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब देखना होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में कितनी निष्पक्षता से जांच कराते हैं और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।