छात्रों की छात्रवृत्ति पर उठे गंभीर सवाल! श्रीराम कॉलेज प्रबंधन की कथित लापरवाही ने बढ़ाया विवाद
निजी खाते में छात्रवृत्ति की रकम ट्रांसफर कराने के आरोप, अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल

जबलपुर। श्रीराम कॉलेज से जुड़ा छात्रवृत्ति राशि का विवाद अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि छात्रों के खातों में आने वाली छात्रवृत्ति की रकम को कथित तौर पर अकाउंटेंट के निजी खाते में ट्रांसफर कराया जाता था। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो सवाल सिर्फ अकाउंटेंट की भूमिका पर नहीं, बल्कि कॉलेज प्रबंधन की निगरानी और जवाबदेही पर भी उठेंगे।
अकाउंट खुलवाने की जानकारी किसे थी?
आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि जिस बैंक खाते में छात्रवृत्ति की रकम ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई, वह अकाउंट कॉलेज के अकाउंटेंट के नाम पर था। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि खाते से जुड़ी जानकारी कॉलेज के जिम्मेदार लोगों को थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि छात्रों की छात्रवृत्ति से जुड़े लेन-देन की कॉलेज स्तर पर निगरानी किस तरह की जा रही थी।
परिवार के सामने मामला आने के बाद बढ़ा विवाद,
मामले में उस समय विवाद बढ़ा जब छात्रवृत्ति की रकम से जुड़े कथित लेन-देन की जानकारी परिवार तक पहुंची। परिजनों ने सवाल उठाते हुए छात्रवृत्ति की राशि का पूरा हिसाब मांगने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद अकाउंटेंट को नौकरी छोड़ने की सलाह दी गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
छात्रवृत्ति की रकम का पूरा हिसाब कहां है?
पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल छात्रवृत्ति के बैंक लेन-देन को लेकर है। कितनी राशि छात्रों के खातों में आई, कितनी राशि आगे ट्रांसफर हुई और यदि निजी खाते में रकम गई तो उसका उद्देश्य क्या था—इन सभी बिंदुओं की बैंक रिकॉर्ड के आधार पर जांच जरूरी है।
शोषण के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता,
इसी विवाद के बीच कॉलेज से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति पर छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और शोषण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ये गंभीर आरोप हैं और इनकी पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता पक्ष और कॉलेज प्रबंधन, दोनों के बयान सामने आना जरूरी है।
कॉलेज प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल,
छात्रवृत्ति छात्रों के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता है। यदि किसी संस्थान में इस राशि के लेन-देन में अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो कॉलेज प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बैंक खाते, छात्रवृत्ति रिकॉर्ड, अनुमति प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई,
फिलहाल सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है। पूरे मामले में छात्रवृत्ति के बैंक खातों, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, कॉलेज के दस्तावेज और संबंधित लोगों के बयान की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में यदि किसी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, आरोपों का सामना कर रहे कॉलेज प्रबंधन और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष भी जांच में शामिल किया जाना जरूरी है।



