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जबलपुर: नाम, पहचान और सम्मान, लावारिस पूजा और उसकी बेटी को मिला आधार, समाज के लिए बनी प्रेरणा

SET NEWS, जबलपुर। कभी 14 साल की उम्र में घायल अवस्था में सड़क किनारे मिली एक अनजान बच्ची आज उसकी पहचान है, उसका परिवार है, और अब उसके पास अधिकार भी हैं। यह कहानी है लावारिस पूजा की, जिसे आश्रय और नई पहचान देने का श्रेय जाता है मोक्ष मानव सेवा एवं जन उत्थान समिति और जिला प्रशासन को। संस्था के संस्थापक आशीष ठाकुर पिछले 25 वर्षों से लावारिस, निराश्रित, बेसहारा जनों को जीवन, सम्मान और संस्कार देने का कार्य कर रहे हैं। यही संस्था पूजा के जीवन का संबल बनी। पूजा को बचपन से मोक्ष आश्रय में पाला गया और 20 अप्रैल 2024 को कमलेश सजन से विवाह करवा कर उसे एक नया जीवन दिया गया। छह माह पूर्व पूजा ने एक बेटी सौम्या को जन्म दिया, परंतु आधार कार्ड न होने के कारण बच्ची का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन पाया। मां-बेटी दोनों शासकीय योजनाओं से वंचित थीं। इस स्थिति को देखकर जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने गंभीरता दिखाई और आधार पंजीयन अधिकारी चित्रांशु त्रिपाठी के समन्वय से शनिवार को भोपाल से विशेष अनुमति लेकर पूजा का आधार कार्ड बनवाया गया। अब पूजा और सौम्या दोनों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा, और एक सामान्य नागरिक के रूप में उनका जीवन आगे बढ़ेगा।

लावारिस का वारिस बना आशीष-
पूर्व कलेक्टर टी. इलैयाराजा के समय पहले ही 55 से अधिक लावारिसों को वोटर आईडी दिलाई गई थी, जिनके अभिभावक के रूप में आशीष ठाकुर का नाम दर्ज है। यह कार्य देशभर में एक मिसाल बना है।

निःस्वार्थ भाव से कर रहे सेवा-
आज मोक्ष आश्रय में दर्जनों लावारिस, दुर्घटनाग्रस्त और समाज से उपेक्षित बुजुर्ग सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। सीमित संसाधनों में भी संस्था के कार्यकर्ता निःस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं।

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