पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया केस में बड़ा ट्विस्ट! पुलिस जांच पर सवाल, कोर्ट से जमानत खारिज—15 लाख के लेनदेन से एक करोड़ की जमीन तक उठे बड़े सवाल”
पूर्व CSP ने पुलिस जांच को कटघरे में खड़ा किया! कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल, 15 लाख के लेनदेन से जमीन सौदे तक उठे बड़े सवाल”

सुनील सेन SET NEWS जबलपुर ! कटनी की पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद कोर्ट का विस्तृत आदेश सामने आया है। आदेश में बचाव पक्ष की ओर से रखी गई दलीलों ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। नेहा पच्चीसिया ने पुलिस की जांच को ही दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया और खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया। अब मामला केवल गिरफ्तारी या अग्रिम जमानत तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पुलिस जांच की निष्पक्षता, उसके आधार और सामने आए आर्थिक लेनदेन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
नेहा का दावा: जमीन सौदे से मेरा कोई लेना-देना नहीं,
अदालत के सामने नेहा पच्चीसिया की ओर से जमीन सौदे में अपनी भूमिका से इनकार किया गया। बचाव पक्ष की दलील थी कि जमीन की रजिस्ट्री दूसरे पक्षों के बीच हुई थी, इसलिए नेहा को इस सौदे से जोड़ना उचित नहीं है। पुलिस जांच को भी दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा गया कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। अब सवाल यह है कि पुलिस ने नेहा को इस मामले से जोड़ने के लिए कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए हैं और उन साक्ष्यों की कड़ी कितनी मजबूत है?
सह आरोपी क्षितिज को पहचानने से इनकार, जांच में कनेक्शन का दावा,
मामले में दूसरा बड़ा मोड़ तब आता है जब नेहा की ओर से क्षितिज राज बरापत्रे को पहचानने से इनकार किए जाने की बात सामने आती है। क्षितिज की ओर से भी दोनों के बीच किसी संबंध से इनकार किए जाने की बात कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन दूसरी ओर पुलिस जांच में दोनों के बीच संबंध की कड़ी होने का दावा किया गया है। ऐसे में एक तरफ बचाव पक्ष की दलील है और दूसरी तरफ जांच एजेंसी के दावे। अब इस विरोधाभास का जवाब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
15 लाख का बैंक लेनदेन बना जांच की अहम कड़ी,
पुलिस जांच में मारुफ अहमद हनफी के बैंक खाते की पड़ताल का भी उल्लेख है। जांच के मुताबिक 15 अप्रैल को उसके खाते में कुल 15 लाख रुपए पहुंचे। इसमें 5 लाख रुपए क्षितिज के खाते से और 10 लाख रुपए शाइन पार्टनर्स के जरिए आने की बात सामने आई है। जांच में शाइन पार्टनर्स का संबंध भी क्षितिज से जोड़े जाने का दावा किया गया है। यही आर्थिक लेनदेन पुलिस के लिए जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है। हालांकि इस लेनदेन का वास्तविक उद्देश्य और इसका पूरे जमीन विवाद से संबंध क्या है, इसका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
एक करोड़ सात लाख की जमीन, लेकिन रकम को लेकर विवाद,
पूरा मामला कटनी के कन्हवारा गांव की खसरा नंबर 2618/1 जमीन से जुड़ा बताया गया है। 15 अप्रैल 2026 को इस जमीन की रजिस्ट्री मारुफ अहमद हनफी के नाम होने की जानकारी सामने आई है। जमीन की सौदे की रकम करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपए बताई गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि उसे केवल 15 लाख रुपए मिले और बाकी रकम को लेकर विवाद हुआ। यही विवाद अब पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
जेल में बंद आरोपी और जमीन सौदे का आरोप,
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि नेहा पच्चीसिया ने जेल में बंद एक आरोपी से जुड़े मामले में चालान पेश करने में कथित देरी कर उसे राहत दिलाई और इसके बदले डराकर एक करोड़ से अधिक कीमत की जमीन हड़पने की साजिश की गई। लेकिन यहां यह साफ करना जरूरी है कि ये शिकायत और अभियोजन से जुड़े आरोप हैं, अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं। आरोपों की वास्तविकता जांच और मुकदमे के दौरान तय होगी।
एक ही वकील, लगातार आवेदन नंबर ने बढ़ाई चर्चा,
कोर्ट रिकॉर्ड में नेहा पच्चीसिया का अग्रिम जमानत आवेदन 821/2026, जबकि क्षितिज राज बरापत्रे का आवेदन 822/2026 दर्ज है। दोनों आवेदन लगातार क्रमांक पर हैं और दोनों की ओर से एक ही अधिवक्ता द्वारा पैरवी किए जाने की बात सामने आई है। यह तथ्य अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब दोनों आरोपी अपने बीच संबंध होने से इनकार कर रहे हों और पुलिस जांच में आर्थिक कड़ी होने का दावा किया जा रहा हो, तब यह तथ्य मामले की परिस्थितियों के संदर्भ में चर्चा जरूर पैदा करता है।
बचाव पक्ष ने बच्चों और पारिवारिक परिस्थितियों का दिया हवाला,
अग्रिम जमानत के पक्ष में नेहा पच्चीसिया की ओर से उनकी पारिवारिक परिस्थितियों का भी हवाला दिया गया। कोर्ट को बताया गया कि उनकी शादी वर्ष 2025 में शून्य घोषित हो चुकी है और उनके दो छोटे बच्चे हैं, जो स्कूल में पढ़ते हैं। बच्चों की जिम्मेदारी भी नेहा पर होने की दलील दी गई। जांच में सहयोग करने की बात भी बचाव पक्ष की ओर से रखी गई। इसके बावजूद अदालत ने इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
अभियोजन बोला: जांच अधूरी, राहत देना उचित नहीं,
अभियोजन ने दोनों अग्रिम जमानत आवेदनों का विरोध किया। आपत्तिकर्ता अधिवक्ता अविनाश तिवारी ने भी जमानत का विरोध किया। अभियोजन की ओर से आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा गया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। कोर्ट के सामने यह भी कहा गया कि आरोपी फरार हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका का तर्क भी रखा गया। ऐसे में अभियोजन ने अग्रिम जमानत को उचित नहीं बताया।
कोर्ट ने केस डायरी देखी, लेकिन आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं दिया,
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लीला लोधी ने दोनों अग्रिम जमानत आवेदनों पर सुनवाई की और केस डायरी का अवलोकन किया। अदालत ने जांच के अधूरे होने और आरोपों की प्रकृति समेत उपलब्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखा। इसके बाद नेहा पच्चीसिया का आवेदन 821/2026 और क्षितिज का आवेदन 822/2026 खारिज कर दिया गया।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अग्रिम जमानत खारिज होना आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अदालत ने इस स्तर पर जमानत के प्रश्न पर फैसला दिया है। आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
अब असली सवाल पुलिस विभाग से,
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल पुलिस विभाग की जांच को लेकर है। जब बचाव पक्ष स्वयं पुलिस जांच को दुर्भावनापूर्ण बता रहा है, तब जांच एजेंसी के सामने चुनौती है कि वह अपने हर दावे को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करे। बैंक लेनदेन की पूरी कड़ी क्या है? 15 लाख रुपए किस उद्देश्य से भेजे गए? शाइन पार्टनर्स की वास्तविक भूमिका क्या है? जमीन सौदे में कौन-कौन शामिल था? और शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों के पीछे पुलिस के पास कौन-कौन से स्वतंत्र साक्ष्य हैं?
सिर्फ आरोपियों तक नहीं, पूरी कड़ी तक पहुंचे जांच,
इस मामले में जनता और पुलिस विभाग दोनों के लिए सबसे अहम बात यही है कि जांच किसी एक व्यक्ति को आरोपी बनाने तक सीमित न रहे। यदि पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं तो आर्थिक लेनदेन से लेकर जमीन की रजिस्ट्री और उससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पूरी कड़ी सामने आनी चाहिए। वहीं यदि बचाव पक्ष के आरोपों में पुलिस जांच को लेकर कोई गंभीर खामी है, तो उसका भी निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। निष्पक्ष जांच का मतलब यही है कि न किसी को बचाया जाए और न किसी को गलत तरीके से फंसाया जाए।
पूर्व CSP का मामला, इसलिए हर कदम पर निगाह,
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें पुलिस विभाग की पूर्व अधिकारी का नाम सामने आया है। ऐसे में पुलिस की जांच पर उठने वाला हर सवाल सीधे विभाग की विश्वसनीयता से जुड़ता है। पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती केवल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपनी जांच की विश्वसनीयता साबित करना भी है।
अब कोर्ट से ज्यादा नजर जांच की अगली चाल पर,
फिलहाल अदालत ने अग्रिम जमानत से राहत नहीं दी है, लेकिन मामले का अंतिम फैसला अभी बाकी है। आगे की जांच में बैंक खातों, जमीन सौदे, रजिस्ट्री, कथित लेनदेन और आरोपों से जुड़े प्रत्येक तथ्य की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अब सवाल सीधा है—क्या पुलिस इस मामले की पूरी सच्चाई सामने लाएगी? क्या 15 लाख रुपए के लेनदेन की पूरी कहानी खुलेगी? क्या जमीन सौदे की हर कड़ी की जांच होगी? और क्या जांच पर उठाए गए सवालों का पुलिस के पास ठोस जवाब है?
सवाल बड़े हैं, जवाब पुलिस को देने होंगे,
एक तरफ पूर्व CSP ने पुलिस जांच को दुर्भावनापूर्ण बताया है, दूसरी तरफ पुलिस जांच में आर्थिक लेनदेन और कथित संबंधों की कड़ी का दावा किया गया है। कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी है, लेकिन आरोपों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
अब पूरे मामले की असली परीक्षा जांच की निष्पक्षता और उसके सामने आने वाले साक्ष्यों की है। क्योंकि इस केस में सिर्फ आरोपी ही कटघरे में नहीं हैं—जांच की विश्वसनीयता भी जनता की नजरों में है।



