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जबलपुर में मानस भवन महासम्मेलन में बड़ा हंगामा, विधायक, आयोजकों का आरोप घटना पूर्वनियोजित, टीआई और स्पेशल ब्रांच की भूमिका संदिग्ध

जबलपुर। कुशवाहा जन जागृति एवं विकास समिति तथा सम्राट अशोक क्रांति सेना द्वारा रविवार को आयोजित सामाजिक-शैक्षणिक जन चेतना महासम्मेलन अचानक अफरा-तफरी और बवाल में बदल गया। शांतिपूर्ण माहौल उस वक्त पूरी तरह बिगड़ गया जब चार-पांच युवक, खुद को बजरंग दल का सदस्य बताते हुए अचानक सभागार में घुस आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ये युवक बिना किसी रोक-टोक के सीधे मंच तक पहुंचे और वहां आपत्तिजनक टिप्पणियां कर भीड़ को उकसाने लगे।
इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, युवक बुक स्टॉल पर टूट पड़े और वहां रखी किताबों को फाड़-फाड़कर हवा में उछालना शुरू कर दिया। अचानक हुए हंगामे से पूरा हॉल दहशत में आ गया। गुस्साए लोगों ने युवकों को पकड़कर उनकी पिटाई कर दी, जिससे माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया। भगदड़ जैसे हालात बन गए और महिलाएं-बच्चे घबराकर बाहर की ओर भागने लगे।
https://youtu.be/2DFZaVykBsk?si=He3Cr6cXXgh6hOjy
आयोजकों का आरोप टीआई मौजूद फिर चूक कैसे-
घटना के बाद आयोजकों ने पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मौके पर मदनमहल थाना प्रभारी संगीता सिंह अपने पूरे दलबल के साथ तैनात थीं, इसके बावजूद युवक बिना रोके-टोके सीधे सभागार और मंच तक पहुंच गए। आयोजकों ने पूछा जब प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच हो रही थी, तब ये युवक किनकी अनुमति से अंदर आए? मंच तक पहुंचना किसकी लापरवाही से संभव हुआ? पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ऐसी बड़ी चूक कैसे हो सकती है। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
विधायक का कटाक्ष पूर्वनियोजित साजिश, पुलिस मूकदर्शक-
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने भी इस घटनाक्रम को पूर्वनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद युवकों का मंच तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की विफलता और पुलिस की संदिग्ध भूमिका को दर्शाता है ।विधायक ने कहा जब भीतर बवाल चल रहा था, पुलिस युवकों को पकड़ने की बजाय किताबों के स्टॉल की अनुमति जांच रही थी। यह रवैया दिखाता है कि पूरी घटना को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
स्पेशल ब्रांच (एसबी) भी फेल, जानकारी तक नहीं दी-
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की खुफिया इकाई स्पेशल ब्रांच (एसबी) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आमतौर पर ऐसे बड़े सामाजिक-राजनीतिक आयोजनों की जानकारी एसबी पहले से पुलिस अधिकारियों को देती है, ताकि आवश्यक बल, सुरक्षा घेरा और खुफिया निगरानी की व्यवस्था की जा सके। लेकिन इस मामले में एसबी की कोई अलर्ट रिपोर्ट या प्राथमिक सूचना उपलब्ध ही नहीं थी, जिसके कारण पर्याप्त सुरक्षा बल, खुफिया निगरानी और व्यवस्था पहले से तय नहीं की जा सकी। आयोजकों का कहना है कि अगर एसबी पहले से आयोजन की जानकारी और संभावित भीड़ की रिपोर्ट देती, तो पुलिस बल, नाकाबंदी और सुरक्षा प्रबंध मजबूत होते और युवक मंच तक पहुंच ही नहीं पाते। एसबी की यह चूक पूरे पुलिस सिस्टम की खामियों को उजागर करती है।
पुलिस जांच में जुटी लेकिन जवाब अब भी गायब-
घटना के बाद पुलिस ने कुछ युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है और पूरी वीडियोग्राफी खंगाली जा रही है। लेकिन अब भी तीन बड़े सवाल जस के तस हैं जब पुलिस-थाना प्रभारी मौजूद थे, तब युवक मंच तक कैसे पहुंच गए। स्पेशल ब्रांच ने आयोजन की अग्रिम रिपोर्ट क्यों नहीं दी। सुरक्षा घेरा इतना कमजोर कैसे रहा। मानस भवन में हुआ यह बवाल न सिर्फ पुलिस की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सुरक्षा और खुफिया तंत्र की बड़ी विफलता भी उजागर करता है।

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