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थाना प्रभारी धीरज कुमार राज ने सड़क पर टेंट की मनमानी पर उठाई आवाज, कथित बदसलूकी और मोबाइल छीनने का आरोप! कांग्रेस के पूर्व पार्षद जितिन राज और रामेश्वर गिरी पर FIR

सड़क जनता की, रास्ता जनता का—फिर आम नागरिक की परेशानी पर सवाल उठाना गलत कैसे?

जबलपुर। शहर की सड़कें आम जनता के आने-जाने के लिए हैं, किसी की निजी जागीर नहीं। जब सड़क पर टेंट लगने से राहगीरों को परेशानी होने की आशंका हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन विजय नगर के SBI चौक पर इसी मुद्दे को लेकर ऐसा विवाद सामने आया, जिसने आम नागरिक के अधिकार और कानून के सम्मान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में विजय नगर थाना प्रभारी धीरज कुमार राज की शिकायत पर कांग्रेस के पूर्व पार्षद जितिन राज और रामेश्वर गिरी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

सादे कपड़ों में अपने क्षेत्र में थे थाना प्रभारी, सड़क के टेंट पर किया सवाल,
पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की रात करीब 12:40 बजे SBI चौक पर टेंट को सड़क से पीछे करने के संबंध में बातचीत के दौरान विवाद हुआ। थाना प्रभारी धीरज कुमार राज उस समय सिविल ड्रेस में थे। आरोप है कि टेंट को लेकर सवाल करने पर जितिन राज ने कथित तौर पर गाली-गलौज की और रामेश्वर गिरी ने थाना प्रभारी का मोबाइल फोन ले लिया। पुलिस का यह भी आरोप है कि दोनों ने अभद्रता और धमकी दी। इन आरोपों की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

CCTV फुटेज ने बढ़ाई चर्चा, पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी,
घटना से जुड़ा CCTV वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। वीडियो को लेकर दावा है कि उसमें थाना प्रभारी के साथ विवाद और मोबाइल फोन खींचने जैसी गतिविधि दिखाई देती है। फुटेज की प्रामाणिकता, पूरा संदर्भ और उसमें दिख रहे घटनाक्रम की जांच जरूरी है। यदि किसी अधिकारी या आम नागरिक के साथ अभद्रता, मोबाइल छीनने या धमकी देने की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल—अगर आम नागरिक सवाल करता तो क्या होता?
जरा सोचिए, अगर सड़क पर टेंट लगने से परेशान कोई आम नागरिक रास्ता खुला रखने की बात कहता, तो क्या उसे भी बहस और धमकी का सामना करना पड़ता? शहर की सड़क पर चलने वाले बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और मरीज भी उसी जनता का हिस्सा हैं, जिसके लिए रास्ता खुला रहना जरूरी है। धार्मिक आयोजन हों या कोई सार्वजनिक कार्यक्रम—आयोजन की आड़ में आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। थाना प्रभारी धीरज कुमार राज के मामले ने इसी सवाल को सामने ला दिया है कि क्या नागरिकों को अपनी परेशानी बताने का अधिकार सुरक्षित है?

राजनीतिक पहचान कानून से ऊपर नहीं,
मामले में जितिन राज को कांग्रेस का पूर्व पार्षद और दुर्गा उत्सव समिति का अध्यक्ष बताया गया है। राजनीतिक पद, सामाजिक प्रभाव या किसी समिति से जुड़ाव किसी को भी कानून से ऊपर नहीं बनाता। वहीं, आरोपों को साबित मान लेना भी उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पुलिस CCTV फुटेज, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करे और जो तथ्य सामने आएं, उनके अनुसार कार्रवाई हो। कानून का सम्मान सभी से अपेक्षित है—चाहे वह आम नागरिक हो, राजनीतिक कार्यकर्ता हो या पुलिस अधिकारी।

FIR दर्ज—अब निष्पक्ष जांच और कार्रवाई पर नजर,
पुलिस के मुताबिक, थाना विजय नगर में अपराध क्रमांक 472/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 296(b), 115(2), 351(3) और 3(5) में जितिन राज और रामेश्वर गिरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि विवाद कैसे शुरू हुआ, मोबाइल फोन के संबंध में क्या हुआ और कथित धमकियों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

जनता का सवाल साफ है—सड़क पर टेंट लगाने से किसी को परेशानी हो, तो क्या वह आवाज भी न उठाए? सार्वजनिक रास्ते पर नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। थाना प्रभारी धीरज कुमार राज की शिकायत पर दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई ही आम नागरिक के अधिकारों और कानून के प्रति भरोसे को मजबूत करेगी।

SET NEWS जबलपुर | सड़क जनता की है—जनता की सुविधा और सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए।