नाना पाटेकर का आखिरी सफर! 75 की उम्र में थमा अभिनय का तूफान, सिनेमा जगत में शोक

जबलपुर! मुंबई/गोवा। भारतीय सिनेमा के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनका निधन हो गया। दिग्गज अभिनेता के जाने की खबर से बॉलीवुड से लेकर उनके करोड़ों प्रशंसकों तक शोक की लहर है।
एक ऐसी आवाज जो पर्दे पर आते ही छा जाती थी,
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनकी पहचान सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि अपनी अलग आवाज, संवाद अदायगी और किरदार में जान डाल देने वाले कलाकार की थी। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में करीब पांच दशक तक दर्शकों का मनोरंजन किया।
‘गमन’ से शुरू हुआ सफर, ‘परिंदा’ ने बनाया पहचान,
वर्ष 1978 में ‘गमन’ से शुरू हुआ नाना पाटेकर का फिल्मी सफर आगे चलकर कई यादगार फिल्मों तक पहुंचा। ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिल पर गहरी छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ में निभाए किरदार के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अभिनेता ही नहीं, निर्देशक और लेखक भी थे नाना,
नाना पाटेकर ने कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने फिल्म निर्माण, निर्देशन और लेखन में भी काम किया। उनका अभिनय किसी एक शैली तक सीमित नहीं रहा—गंभीर किरदार हो, खलनायक की भूमिका हो या भावनात्मक चरित्र, उन्होंने हर भूमिका को अपनी अलग पहचान दी।
निधन से कुछ दिन पहले तक सक्रिय थे,
नाना पाटेकर निधन से कुछ दिन पहले ही एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके अचानक निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करीबियों को झकझोर दिया। अस्पताल पहुंचने के बाद उनके भतीजे सचिन पाटेकर भावुक नजर आए। अभिनेता सयाजी शिंदे भी खबर मिलते ही अस्पताल पहुंचे।
पंकज त्रिपाठी ने कहा—मेरे लिए व्यक्तिगत नुकसान,
अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि उनका जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने नाना को अपना गुरु बताते हुए कहा कि उनके साथ काम करने के दौरान अभिनय और जिंदगी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलीं।
पर्दा गिर गया, लेकिन किरदार हमेशा जिंदा रहेंगे,
नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का अंत है। एक ऐसा कलाकार, जिसकी आवाज सुनते ही किरदार आंखों के सामने आ जाता था, अब सिर्फ यादों और फिल्मों में रह गया है। नाना पाटेकर ने जो किरदार निभाए, जो संवाद बोले और अभिनय की जो छाप छोड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी सबसे बड़ी विरासत रहेगी।



